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10 दिन बाद भी चेन्नई बाढ़ का पानी सड़कों पर है। गटर और नालों का पानी अब घर में है। क्या ये कुदरत का कहर है? इसमें कोई दो राय नहीं की बारिश बहुत हुई और किसी भी शहर के ऐसे ही हालात इस बारिश के बाद होंगे। चेन्नई में रहते हुए वहां कि बारिश के बारे में एक बात बहुत साफ समझ में आई कि थोड़ी देर भी झमाझम बारिश हो जाए तो सड़कें लबालब हो जाती हैं। ये बारिश की ताकत नहीं बल्कि सड़कों की दुर्दशा है। ड्रेनेज सिस्टम की खामी है।

Rescued Indian residents carry their possessions and animals after their evacuation by army personnel from floodwaters in Chennai on December 3, 2015. Thousands of rescuers raced to evacuate residents from deadly flooding, as India's Prime Minister Narendra Modi went to the southern state of Tamil Nadu to survey the devastation. More than 40,000 people have been rescued in recent days after record rains lashed the coastal state, worsening weeks of flooding that has killed 269 people AFP PHOTO/STR / AFP / STRDEL (Photo credit should read STRDEL/AFP/Getty Images)
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Rescued Indian residents carry their possessions and animals after their evacuation by army personnel from floodwaters in Chennai on December 3, 2015. Thousands of rescuers raced to evacuate residents from deadly flooding, as India’s Prime Minister Narendra Modi went to the southern state of Tamil Nadu to survey the devastation. More than 40,000 people have been rescued in recent days after record rains lashed the coastal state, worsening weeks of flooding that has killed 269 people AFP PHOTO/STR / AFP / STRDEL (Photo credit should read STRDEL/AFP/Getty Images)

ऐसा नहीं कि बारिश की ताकत कम थी, लेकिन ये भी सच है कि चेन्नई इस बारिश को ही नहीं किसी भी बारिश को झेलने के लिए तैयार नहीं है। वहां लोगों में खासा गुस्सा है और इस गुस्से की वजह है हालात को जानते बूझते नेताओं का कुछ नहीं कर पाना। जब लोगों से बात की तो उन्होंने वॉटर लॉगिंग की समस्या को चेन्नई के लिए पहले से ही बड़ी मुसीबत बताया, लेकिन राजनेताओं ने कभी उसे गंभीरता से लिया ही नहीं।

अब जब राहत और बचाव का काम चल रहा है तो नेता जनता के बीच जाने से भी घबरा रहे हैं। मैं सईदापेट, अलवरपेट, रायपेट जिस भी इलाके में गया लोगों ने घेर लिया। उनका गुस्सा बहुत साफ समझ में आ रहा था। उनकी भाषा समझने में मेरे कैमरामैन डी. व्यंकटेश बहुत मददगार साबित हुए क्‍योंकि वो चेन्नई मूल के ही थे। साथ ही चेन्नई के इलाकों की जानकारी ने भी हमें चेन्नई के जमीनी हालात को समझने में बहुत मदद की।

मेरे कैमरामैन व्यंकट का परिवार भी बाढ़ में फंसा हुआ था। वे खुद 8 दिनों के इस कवरेज के दौरान शुरूआती 5 दिनों में अपने परिवार से संपर्क नहीं कर पाए। इससे आप अंदाजा लगा सकते हैं कि टीवी कैमरों पर दिखने वाले हालात से कहीं ज्यादा खराब हालात चेन्नई के हैं। सेना के मेजर राकेश के साथ में एक रेस्क्यू ऑपरेशन के लिए गया। एक बुजुर्ग महिला 8 दिनों से अपने घर में थीं और उन्हें इलाज की जरूरत थी। सेना उन्हें निकालकर सुरक्षित स्थान पर ले गई, लेकिन सेना के लिए भी हर घर में पहुंच पाना संभव नहीं हो पा रहा है।

अब तो हालात और बुरे हैं क्‍योंकि रुका हुआ पानी गंदगी और बदबू से भरपूर है। उससे बीमारियां फैलने की आशंकाएं बड़ी चुनौती बनी हुई है। अब राजनेताओं ने राहत कार्यों में अपनी तस्वीरों से आगामी चुनाव की तैयारियों का ऐलान कर दिया है। राहत कार्यों के लिए दी जा रही पानी की बोतलों पर जयललिता की तस्वीरें हैं। स्टालिन भी राहत कार्यों में खुद पहुंचकर तस्वीरों और टेलीविजन फुटेज का हिस्सा बनते दिखाई दे रहे हैं। जया टीवी पर सभी सत्ताधारी नेताओं को ऐसे दिखाया जा रहा है, जैसे वो पूरे प्राणपण से राहत कार्यों में जुटे हुए हैं। हकीकत ये है कि प्रभावित इलाकों में यदि ये नेता चले जाएं तो इनकी शामत आ जाए।

अब राहत के लिए जा रही टीमों को सुरक्षा घेरे में ले जाना पड़ रहा है क्‍योंकि इन ट्रकों में लूटमार की आशंका लगातार बनी हुई है। आर्मी राज्य सरकार के राहत सामान को प्रभावित इलाकों तक पहुंचाने का काम कर रही है। आर्मी के जवानों के लिए भी हालात बहुत चुनौतीपूर्ण हैं। दिन भर गंदे पानी में खड़े होने की वजह से सेना के जवानों पर भी बीमारी का खतरा लगातार बना हुआ है।

Indian people sort through their possessions next to damaged homes as floodwaters recede in Chennai on December 6, 2015. Residents in India's southern Tamil Nadu state were grappling with the aftermath of devastating floods as authorities stepped up relief work following the worst deluge in decades that killed over 250 people. AFP PHOTO / AFP / STR (Photo credit should read STR/AFP/Getty Images)
Indian people sort through their possessions next to damaged homes as floodwaters recede in Chennai on December 6, 2015. Residents in India’s southern Tamil Nadu state were grappling with the aftermath of devastating floods as authorities stepped up relief work following the worst deluge in decades that killed over 250 people. AFP PHOTO / AFP / STR (Photo credit should read STR/AFP/Getty Images)

अपनी रिपोर्टिंग के दौरान मैं खुद तेज बुखार और जुकाम की चपेट में आया। दिमाग में यही खयाल आ रहा था कि उन लोगों का क्या होगा जिन्हें इन्हीं हालात में यहां जीना है? चेन्नई एक्सप्रेस के पटरी से उतरने की बड़ी वजह इस तरह के हालात से निपटने के लिए तैयार न होना है। तमिलनाडू की राजनीति भी चेहरों के इर्द-गिर्द ही घूमती है और यहां एक चुनाव जीतने के बाद अगले चुनाव की तैयारी शुरू हो जाती है। जयललिता के सत्ता में आने के बाद वॉटर लॉगिंग जैसी भयानक चुनौती से लड़ने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए।

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ऐसा ही करुणानिधि के कार्यकाल में भी हुआ था। राजनैतिक इच्छाशक्ति की कमी ने चैन्नई के हालात ऐसे बना दिए हैं कि अब उसके पटरी पर लौटने में ही बहुत समय लगेगा। आगे ऐसे हालात से लड़ने की तैयारी करना तो दूर की कौड़ी है। ये भी पहला मौका होगा जब मोदी भी जयललिता और करुणानिधि के अलावा तीसरा विकल्प जनता के सामने शायद इन चुनावों में रख पाएं। अगले चुनाव में क्या होगा ये तो कहना मुश्किल है लेकिन ये सच है कि यदि चैन्नई को आगे भी ऐसे हालात से लड़ने के तैयार नहीं किया गया तो इस तबाही से भी खतरनाक मंजर सामने आ सकते हैं।

_______________ डॉ. प्रवीण तिवारी

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