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जलवायु परिवर्तन पर इतनी बहस के बाद भी दुनिया महाविनाश के रास्ते पर आधी दूरी तय कर चुकी है. इसके नतीजे में हमें निकट भविष्य में ही बहुत बुरे दिन देखने होंगे. climate-change-1-800x400
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पेरिस में हुए जलवायु सम्मेलन में हिस्सा लेने वाले देश एक समझौते पर पहुंच चुके हैं. इस पर सहमति बन गई है कि औसत वैश्विक तापमान में बढ़ोतरी को दो डिग्री से कम रखना है. बल्कि कोशिशें होनी हैं कि इस बढ़ोतरी को 1.5 डिग्री तक ही सीमित कर दिया जाए.

लेकिन सम्मेलन से पहले इन 185 देशों ने पर्यावरण से जुड़े जो कदम उठाने का वादा किया था उसे देखते हुए यह संभव नहीं लगता. इन सभी कदमों पर गौर किया जाए तो तापमान में बढ़ोतरी का यह आंकड़ा 2.7 डिग्री पर जाकर ठहरता है.

अब तक दर्ज किए गए गर्म साल का रिकॉर्ड 2015 के नाम होने वाला है. पूरी संभावना है कि वैश्विक औसत तापमान में एक डिग्री की बढ़ोतरी हो चुकी है.

ग्लोबल वार्मिंग का अभी हम पर क्या असर हो रहा है?
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