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naga kumbh

उज्जैन- सिंहस्थ के प्रथम शाही स्नान के साथ ही उज्जैन में नागा साधु बनाने की प्रक्रिया प्रारम्भ हो जाएगी। नागा साधुओं द्वारा क्षिप्रा में 108 डुबकी लगवाकर नए साधुओं को संस्कारित करने का अनुष्ठान शुरू कर दिया जाएगा। सिंहस्थ में दीक्षित किये जाने वाले साधु खूनी नागा कहलाएंगे। गौरतलब है कि नागा साधु बनाने की प्रक्रिया कुम्भ के दौरान ही पूरी की जाती है।

उज्जैन में दीक्षा लेने वाले खूनी नागा – अलग-अलग कुम्भ में दीक्षित नागाओं को अलग अलग नाम से पुकारा जाता है, जिससे कि इस बात की पहचान हो सके कि उन्होंने दीक्षा कहां से ली है। प्रयाग के महाकुम्भ में दीक्षा लेने वालों को नागा, उज्जैन में दीक्षा लेने वालों को खूनी नागा, हरिद्वार में दीक्षा लेने वालों को बर्फानी व नासिक वालों को खिचडिय़ा नागा के नाम से जाना जाता है। इन्हें अलग-अलग नाम से केवल इसलिए जाना जाता है, जिससे उनकी यह पहचान हो सके कि किसने कहां दीक्षा ली है।

अखाड़ों की जांच के आधार पर चुने जाएंगे योग्य – नागा साधु का जीवन और उनके नागा बनने की प्रक्रिया बेहद मुश्किल होती है ,नागा साधुओं को दीक्षा लेने से पहले कई मुश्किल परीक्षाओं से होकर गुजरना पड़ता है। जूना अखाड़े के खाकी बाबा कहते हैं। एक नागा साधु अपने जीवित रहते हुए मृत्यु उपरान्त के सारे संस्कार कर लेता है।

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