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अर्नब के इंटरव्यू ने न्यूज़ चैनल और मेनस्ट्रीम अखबारों में हलचल मचा दी! इस इंटरव्यू से सबसे बड़ी मायूसी ज़ी टीवी और इंडिया टीवी को हुई है।

टाइम्स नाउ के स्टार एंकर अर्नब गोस्वामी ने पीएम मोदी का एक्सक्लूसिव इंटरव्यू करके जहाँ अपने कद को और भी बड़ा कर लिया है वहीं कांग्रेस ने उन्हें आज मोदी का मुखपत्र कहकर ये जताया की ये ‘शो’ मैनेज था। लेकिन अर्नब के इंटरव्यू ने न्यूज़ चैनल और मेनस्ट्रीम अखबारों में हलचल मचा दी। इस इंटरव्यू से सबसे बड़ी मायूसी ज़ी टीवी और इंडिया टीवी को हुई है। खासकर सरकारी हलकों में ये चर्चा थी कि मोदी ने ये इंटरव्यू अपने ख़ास कहे जाने वाले इंडिया टीवी के मालिक रजत शर्मा को क्यों नहीं दिया। रजत शर्मा के इंडिया टीवी की रीच टाइम्स नाउ से चार दूनी है और मुसीबतों के दिन  इंडिया टीवी ने मोदी का हमेशा साथ दिया है।

रजत के उतने करीब नहीं रहे मोदी 

पीएमओ सूत्रों के मुताबिक रजत शर्मा काफी समय से साउथ ब्लॉक से दूर हैं। हालाँकि प्रधानमंत्री के प्रमुख सचिव नृपेंद्र मिश्र से उनकी नज़दीकियां बरकरार है लेकिन मोदी के सबसे विश्वसनीय पत्रकारों कि सूची  में अब रजत शर्मा की जगह अर्नब और स्वपनदास  गुप्ता का नाम ज्यादा ऊपर है। सूत्रों के मुताबिक प्रधानमंत्री बनने के बाद मोदी ने धीरे धीरे व्यवसायिक महत्वाकांक्षाएं रखने वालो से थोड़ी दूरी बनाई है चाहे वो मीडिया मुग़ल हो या  उनके एक समय के करीबी उद्योगपति गौतम अडानी हों।

इंटरव्यू से अर्नब को फायदा कम नुक्सान ज्यादा होगा 

अरबों रूपए के टाइम्स साम्राज्य को इस इंटरव्यू को फौरी लाभ ज़रूर मिला है और अर्नब  अब  मालिकों के और भी प्रिय हो चुके हैं लेकिन पेशेवर जीवन में ये इंटरव्यू  उनकी साख पर बार बार सवाल उठाएगा। खासकर आप और कांग्रेस अर्नब को अब हर किसी खबर पर बीजेपी का प्लांट कहने में कोई कसर नहीं छोड़ेंगे। ” मोदी की  अपनी शैली है। वो जिसे पसंद करते हैं तो खुलकर पसंद करते हैं। अर्नब की नेशनलिस्ट रिपोर्टिंग उन्हें पिछले कुछ समय से भा गई है और ये उन्होंने ज़ाहिर कर दिया है। अर्नब भले ही अड़ियल हो लेकिन पावर ब्रोकर नहीं हैं। ये खूबी उन्हें मोदी के करीब लायी है।  लेकिन बेहतर होता मोदी इंटरव्यू आजतक या एबीपी जैसे नॉन पार्टी लाइन चैनल को देते तो इतने सवाल न उठते,” एक अंग्रेजी अखबार के संपादक ने इंडिया संवाद से कहा। बहरहाल देश के बड़े मीडिया समूह अब सूचना प्रसारण मंत्री अरुण जेटली पर पीएम के इंटरव्यू के लिए दबाव बना रहे हैं। लेकिन इंटरव्यू की हरीझंडी जेटली को नहीं मोदी को खुद देनी है।

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