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आखिर देश में क्या हो रहा है ये अध्यात्म के नाम पर, क्या इस सच्चाई को जानना चाहेंगे आप..!

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Sonal Patel – तामझाम व्यवसाय ही है। इसका अध्यात्म और सत्य की खोज से कोई वास्ता नहीं। हालांकि ये भी सच है कि ज्यादातर लोग इसी चकाचौंध को देखकर बाबाओं के पीछे भागते हैं। भव्य कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है। आए दिन बड़े बड़े मंदिर, मठ और आश्रम बनाए जाते हैं। इन सबका ईश्वर की प्राप्ति से क्या लेना-देना।

दरअसल, यहां अपनी बात कहने के बजाए एक महान संत के ही विचार रखना ठीक रहेगा। क्रांतिकारी संत के तौर पर जाने जाने वाले महान संत स्वामी शरणानंद ने कहा था कि मेरी मृत्यू के उपरांत कोई समाधी स्थल या मूर्ति आदि मत लगाना। लोग इनसे गुमराह हो जाते हैं। ये बात उन्होंने इसीलिए कही थी कि अलौकिक अनुभूतियों के लिए लौकिक जगत से कोई रास्त जा ही नहीं सकता।

आप संसार से ऊपर उठकर ही ईश्वर प्राप्ति के पथ पर बड़ सकते हैं। उत्सव का मानव जीवन में हमेशा से महत्व रहा है। उत्सव आज भी होते हैं और उन उत्सवों में लोग आनंदित भी होते हैं। कई फिल्म अवॉर्ड समारोह हैं, तो कई ईवेंट रोज तमाम छोटे बड़े शहरों में होते रहते हैं। इसकी चकाचौंध और लोगों को इकठ्ठा करनी की कोशिशों को भी हम देखते रहते हैं। कई तरह के कार्यक्रमों में मोटी कमाई की जाती है ये भी किसी से छिपा नहीं है। व्यवसाय जगत में तो ये आयोजन आम बात है, अपनी धमक दिखाने के लिए, लोगों को अपने साथ जोड़ने के लिए।

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