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कुछ बातें करनी बेहद ज़रूरी होती हैं। अब एक बात बताइए शादी की उम्र कानून के हिसाब से क्या तय है? मतलब जो सबसे कम उम्र तय किया गया है। वो है लड़कियों के लिए 18 और लड़कों के लिए 21। ठीक है! अब एक और सवाल।

शादी के बाद अगर पति अपनी पत्नी के साथ सेक्स के लिए ज़ोर ज़बरदस्ती करता है, वो सही है या गलत?

अगर इस सवाल का जवाब आपके हिसाब से सही है। तो आपको एक बार सोचने और समझने की ज़रूरत है। और अगर आप मानते हैं कि ये गलत है। तो आप जान लीजिए कि भारतीय संविधान के हिसाब से ये गलत नहीं है। उसे आप रेप नहीं कह सकते। खास कर उन लड़कियों से कह रहा हूं। आप जो बात-बात पर अपने हक़ और बराबरी की बात करती हैं न! वो सब हवा हो जाएगी कोर्ट पहुंचते ही। और ये बात मैं नहीं कह रहा हूं। ये बातें कही गई हैं, इंडियन गवर्नमेंट की एक एफिडेविट में। जो उन्होंने दिल्ली हाई कोर्ट में पेश की है।

क्या है पूरा मामला?

अब सुनिए पूरी बात। रिट फाउंडेशन (RIT foundation) नाम की एक एन.जी.ओ है। उसने दिल्ली हाई कोर्ट में पीआईएल डाला था। पीआईएल मतलब पब्लिक इंटरेस्ट लिटिगेशन या जनहित याचिका बोलते हैं जिसको। अपने पीआईएल में एनजीओ फाउंडेशन ने कोर्ट से कहा कि आईपीसी की धारा 375 जो है, वो पति और पत्नी के बीच के सेक्स को रेप के रूप में डिफाइन नहीं करती है जो कि गलत है।

क्यों गलत है?

तो इनका इस बारे में ये तर्क था कि ये तो एक तरह से पति को संवैधानिक तौर पर लाइसेंस देने की तरह है कि वो अपनी पत्नी के साथ जब चाहे सेक्स करे। इससे कोई फ़र्क नहीं पड़ता कि उसकी पत्नी राजी है या नहीं। और ये हमारे संविधान के अनुच्छेद 21 में, जो पत्नी को अपनी प्राइवेसी रखने का अधिकार है, उसे भी काट देती है। दूसरी बात कि यहां जो एज लिखी गई है वो तो और भी महान है। महान कैसे? इसमें लिखा है। अगर बीवी या पत्नी की उम्र 15 साल से अधिक है तो। तो ये सेक्स रेप की केटेगरी में नहीं आएगा। मतलब एक साथ यहां पूरा माटी-पलीत हो गया।

अब जब शादी की कम से कम उम्र 18 तय की हुई है। तो फिर 15 में शादी कैसे? और अगर आप ये बात भी मान ही रहे हैं कि शादी 15 में हो सकती है तो फिर बेकार के नए-नए नियम बनाने का क्या फायदा!

सरकार क्या बोली अपने एफिडेविट में?

सरकार का कहना है कि हां, हम ये मानते हैं कि जो शादी की उम्र तय की गई है। जिसमें कि लड़की को शादी के लिए तैयार माना जा सकता है। वो 18 है। और हम बाल विवाह को भी रोकने की कोशिश में लगे ही हैं। लेकिन हमारे यहां कि जो सोशल कंडीशन है, जो शिक्षा की हालत है। उसके हिसाब से कुछ-कुछ चीज़ें ऐसी हैं जिसे की एक्सेप्शन के लिए मानना पड़ता है। बहुत बढ़िया बात बोले हैं।

हम पूछते है:

माननीय प्रधानमंत्री जी अपने भाषणों में लगातार ये कहते आ रहे हैं। एक कि हम बहुत सारे बेकार के कानून हटा रहे हैं। इसको जितना हो सके सिंपल करना है। दूसरा बेटियां देश का भविष्य हैं, बेटी बचाओ, बेटी पढाओ। इन्हें बराबरी का हक़ है। सब बढ़िया। लेकिन इस पर क्या कहना चाहेंगे महोदय!

और उम्र को मारो गोली पहले ये बताओ लड़की 18 की हो या 28 की। तो क्या लड़के को जब जो जी में आए करे। क्योंकि कानून ने शादी-शुदा लड़की को एक सेक्स मैटेरियल का तमगा दे दिया है। अजी हां, ठीक है। आपने ऐसा नहीं कहा। जो पहले से लिखा है। उसका मतलब तो यही है न!

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