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हमारे शरीर में जो चुम्बकीय प्रवाह बहता है उसके स्विच बोर्ड दोनों हथेलियों एवं पैर के दोनों तलुओं में है। चित्र में ये अलग-अलग स्पर्शबिन्दु कहाँ-कहाँ है यह दर्शाया गया है।

  1. मस्तिष्क 2. मानसिक नर्वस 3. पीटयुटरी 4. पीनीअल 5. मस्तिष्क की नर्वस 6. गला 7. कण्ठ 8. थाइरोइड, पेराथाइरोइड 9. मेरुदण्ड 10. अर्श-मसा 11. प्रोस्टेट 12. योनिमार्ग 13. जननेन्द्रिय 14. गर्भाशय 15. अंडाशय 16. कमर, रीढ़ का नीचे का भाग, लिम्फ, ग्लेंड 17. जाँघ 18. ब्लेडर 19. आँतें 20. गुदा 21. एपेण्डिक्स 22. पित्ताशय 23. लीवर 24. कंधे 25. पेन्क्रियास 26. गुर्दा (किडनी) 27. जठर 28. आड्रेनल 29. सूर्यकेन्द्र 30. फेफड़े 31. कान 32. शक्तिकेन्द्र 33. नर्वस और कान 34. नर्वस और जुकाम 35. आँखें 36. हृदय 37. तिल्ली (स्पलीन,यकृत, प्लीहा) 38. थाइमस

दबाव डालने की रीतEar-Acupressure

इसमें हथेलियों एवं पैरों के तलुओं के बिन्दुओं एवं उनके आसपास दबाव दिया जाता है। ऐसा करने से बिन्दुओं के साथ जुड़े हुए अवयवों की ओर चुम्बकीय प्रवाह बहने लगता है। जैसे कि जब अँगूठे में स्थित मस्तिष्क के बिन्दु पर दबाव डाला जाये तो चुंबकीय प्रवाह मस्तिष्क में बहने लगता है जो कि मस्तिष्क को अधिक क्रियाशील बनाता है।

अँगूठे अथवा पहली उँगली अथवा बिना नोंक की हुई पेन्सिल से बिन्दुओं के ऊपर दबाव दिया जा सकता है। किसी भी बिन्दु पर 4 से 5 सेकेन्ड तक दबाव डालें। इसी प्रकार एक से दो मिनट तक पंपिंग पद्धति से दबाव डालें या फिर भारपूर्वक मालिश करें। बिन्दु पर दबाव का भार अनुभव हो उतना ही दबाव डालें, ज्यादा नहीं। नरम हाथ होंगे तो कम दबाव डालने से भी दबाव का अनुभव होगा। अंतःस्रावी ग्रंथियों के बिन्दुओं के सिवाय प्रत्येक बिन्दु पर आड़े अँगूठे द्वारा भार डालने से आवश्यक दबाव डल जायेगा जबकि अंतः स्रावी ग्रंथियों के बिन्दुओं पर अधिक दबाव देने के लिए अँगूठे, पेन्सिल या पेन का उपयोग किया जा सकता है।

शरीर के दायें भाग के अवयवों में तकलीफ अथवा दर्द हो तो दाँयें हाथ की हथेली या दायें पैर के तलुए के दबाव बिन्दुओं पर दबाव डालें। उसी प्रकार शरीर के बाँयें भाग की तकलीफों के लिए तत्संबंधी बायें हाथ की हथेली या बायें पैर के तलुए के दबाव-बिन्दुओं पर दबाव डाला जाना चाहिए।

शरीर के पीछे के भाग, रीढ़ की हड्डी, ज्ञानतंतुओं, कमर, सायटिका नस, जाँघ वगैरह आते हैं उसके लिए हथेली के पीछे के भाग में या पैर के ऊपर के भाग में दबाव दिया जाता है।

किसी भी रोग अथवा अवयव की खराबी के लिए हथेलियों के बिन्दुओं पर दिन में तीन बार 1 से 2 मिनट तक दबाव दिया जा सकता है और पैर के तलुओं के बिन्दुओं पर एक साथ पाँच मिनट तक दबाव डाला जा सकता है। जब तक बिन्दुओं का दर्द न मिटे तब तक इस प्रकार उपचार चालू रखें।

अन्तःस्रावी ग्रंथियाँ- ये ग्रंथियाँ शरीर के समस्त अवयवों का संचालन करती हैं। उनके बिन्दुओं पर अधिक दबाव दिया जाना चाहिए। यदि कोई ग्रंथि कम कार्य करती हो तो दबाव देने से उसकी कार्यशक्ति बढ़ती है और वह ठीक से कार्य करने लगती है। किन्तु यदि कोई ग्रंथि अधिक (आवश्यकता से अधिक) क्रियाशील हो तो दबाव डालने से उस ग्रंथि का कार्य कम अर्थात् आवश्यकतानुसार हो जाता है। इस प्रकार दबाव देने से अंतःस्रावी ग्रंथियों का नियमन हो सकता है।

रोगों से बचाव

Prevention is better than cure. दोनों हथेलियों एवं पैरों के तलुओं के बिन्दुओं पर रोज दस मिनट तक दबाव डालकर उन्हें सँभाल लिया जाये तो समस्त अवयव बैटरी की तरह रीचार्ज होकर क्रियाशील हो उठते हैं, अंतःस्रावी ग्रंथियाँ ठीक से कार्य करने लगती है, रोग प्रतिकारक शक्ति बढ़ती है और रोग होने की सम्भावना कम हो जाती है।

सूर्य बिन्दुः सूर्यबिन्दु छाती के परदे (डायाफ्राम) के नीचे आये हुए समस्त अवयवों का संचालन करता है। नाभि खिसक जाने पर अथवा डायाफ्राम के नीचे के किसी भी अवयव के ठीक से कार्य न करने पर सूर्यबिन्दु पर दबाव डाला जाना चाहिए।

शक्तिबिन्दुः जब बहुत थकान हो या रात्रि को नींद न आयी हो तब इस बिन्दु को दबाने से वहाँ दुःखेगा। उस समय वहाँ दबाव डालकर उपचार करें।

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