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डॉ. कलाम। ये हम सब जानते हैं कि वो इस युग के महानायक थे, उनका जीवन हमारे लिए किसी अनमोल रत्न से कम नही था। उन्होंने हमेशा ही हमें सपने देखना और उसे जीना सिखाया। उन्होंने अपने जीवन का एक-एक पल भारत के उन्नति के लिए दिया। वह सिर्फ़ भारत के मिसाइल कार्यक्रम के पिता ही नहीं थे, बल्कि हमारे देश के सबसे प्यारे राष्ट्रपतियों में से एक थे। परंतु जब आप रामेश्वरम में उनके ‘अंतिम आरामगाह’ की दुर्दशा देखेंगे, तो ज़रूर आपका दिल भर आएगा।

यह देखना बेहद ही निराशाजनक है कि भारत को लोहे सा समृद्ध बनाने वाले हमारे प्यारे अब्दुल कलाम को सिर्फ़ एक टिन शेड नसीब हुआ है।

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आने वाली जुलाई 27, 2016 को मिसाइल मैन और जनता के राष्ट्रपति के नाम से जाने जाने वाले हम सबके प्रिय डॉक्टर कलाम को, एक साल हो जाएंगे जब वे हमारा साथ छोड़ कर चले गए थे। उनको 30 जुलाई 2015 को पूरे सम्मान के साथ रामेश्वरम के पी करूम्बु ग्राउंड में दफ़नाया गया था।

आपको बता दें कि उनके अंत्येष्टि स्थल पर एक स्मारक बनाने का वादा किया गया था, लेकिन यह बेहद शर्मनाक है कि स्मारक के नाम पर लगभग एक साल में सिर्फ़ एक टीन का शेड ही बन पाया है।

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यही नही आज उनकी अंत्येष्टि स्थल पर जो अव्यवस्था देखने को मिली है, उससे ज़रूर हर भारतीय का दिल आहत  होगा। स्मारक की बात छोड़िए यह जगह सरकार और लोगों की अपेक्षा का इस कदर शिकार हुआ है की यहाँ आवारा पशुओं का ठिकाना बन गया है।

क्या यह कहना सही नही होगा कि यह तस्वीर उस भारत को दर्शाती हैं जहाँ नेताओं और अधिकारियों को सिर्फ़ अपनी कुर्सी और पद से मोह है? क्या यह कहना ग़लत होगा कि यह तस्वीर बयान करती है उस भारत कि जहाँ सिर्फ़ भ्रष्ट, अवसरवादी और झूठे राष्ट्रवादी साख का चोला पहने लोगों की ही पूछ है?

वहीं एक विनम्र, सच्चे और ईमानदार राष्ट्रपति, वैज्ञानिक, शिक्षक और भारत के बेहतरीन मिसाल और आदर्श के लिए कोई जगह नहीं है। ये ज़रूर है कि अगर उनका स्मारक बन जाए तो आने वाली पीढ़ियों के लिए एक निशानी के रूप में उन्हें प्रेरित करती रहेगी। पर इतना ज़रूर कहना चाहूँगा कि उनकी सही जगह हमारे दिलों में है, जो हमेशा ही हमें प्रोत्साहित करती रहेगी।

 

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