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पहला प्रयोगः 2-2 ग्राम मुलहठी, आँवले और मिश्री का 20 से 50 मिलिलीटर काढ़ा देने से या भोजन के पश्चात् 1 ग्राम काली मिर्च के चूर्ण में घी डालकर चटाने से लाभ होता है।

दूसरा प्रयोगः आवाज सुरीली बनाने के लिए 10 ग्राम बहेड़ा की छाल को गोमूत्र में भावित कर (किसी चूर्ण को किसी द्रव्य के साथ मिलाकर सूख जायें तब तक घोंटना = भावित करना) चूसने से आवाज एकदम सुरीली होती है।

यह प्रयोग खाँसी में भी लाभदायक है।

तीसरा प्रयोगः 10-10 ग्राम अदरक व नींबू के रस में एक ग्राम सेंधा नमक मिलाकर दिन में तीन बार धीरे-धीरे पीने से आवाज मधुर होती है।

चौथा प्रयोगः आवाज सुरीली करने के लिए घोड़ावज का आधा या 1 ग्राम चूर्ण 2 से 5 ग्राम शहद के साथ लेने से लाभ होता है। यह प्रयोग कफ होने पर भी लाभकारी है।

पाँचवाँ प्रयोगः जामुन की गुठलियों को पीसकर शहद में मिलाकर गोलियाँ बना लें। दो-दो गोली नित्य चार बार चूसें। इससे बैठा गला खुल जाता है। आवाज का भारीपन ठीक हो जाता है। अधिक बोलने-गानेवालों के लिए यह विशेष चमत्कारी प्रयोग है।

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