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Sheela-Dixit

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पिछले कुछ समय में दिल्ली सरकार द्वारा पार्टी के विधायकों के खिलाफ आये कुछ मामलों ने दिल्ली सरकार के 48 विधायकों के भविष्य को खतरे में डाल दिया है।

नई दिल्ली : दिल्ली में बम्पर बहुमत से चुनकर आयी आम आदमी पार्टी की सरकार इतनी मजबूत है कि उसे किसी तरह अस्थिर नहीं किया जा सकता है। यह कहना किसी के लिए भी संदेह की बात नहीं है लेकिन पिछले कुछ समय में दिल्ली सरकार द्वारा पार्टी के विधायकों के खिलाफ आये कुछ मामलों ने दिल्ली सरकार के 48 विधायकों के भविष्य को खतरे में डाल दिया है। 70 सीटों वाली दिल्ली विधानसभा में आम आदमी पार्टी के 67 विधायकों के साथ जीतकर आयी थी जबकि बीजेपी के तीन विधायक हैं। आम आदमी पार्टी पर अपने 21 विधायकों को लाभ के पद पर बैठाए जाने का आरोप है।

21 विधायकों पर संसदीय सचिव बनकर लाभ पहुंचाने का आरोप

दिल्ली सरकार पर आरोप है कि उसने दिल्ली में अपने 21 विधायकों को संसदीय सचिव बनाकर लाभ का पद दिया। हालाँकि आम आदमी पार्टी कहती है कि उन्होंने इन विधायकों को आमदनी, गाडी बंग्ला जैसी सुविधाएं नहीं दी, लेकिन सही क्या है इसे चुनाव आयोग को तय करना है। नियमों के मुताबिक अगर इस ये 21 विधायक दोषी पाए जाते हैं तो उन्हें अपनी विधायकी की मान्यता से हाथ धोना पड़ेगा।

27 विधायकों पर ऑफिस ऑफ़ प्रॉफिट का आरोप

एक अन्य मामले में चुनाव आयोग को दिल्ली सरकार के अन्य 27 विधायकों के खिलाफ शिकायत की गई है। दिल्ली की केजरीवाल सरकार पर आरोप है कि उसने विधायकों को उनके इलाके के अलग-अलग सरकारी अस्पतालों में रोगी कल्याण समिति के अध्यक्ष बनाया है। जबकि केंद्र सरकार की 2015 की गाइडलाइंस के हिसाब से सिर्फ स्वास्थ्य मंत्री, क्षेत्रीय सांसद, जिला पंचायत अध्यक्ष या फिर जिलाधिकारी ही रोगी कल्याण समिति का अध्यक्ष बन सकते हैं। शिकायत के अनुसार 27 विधायकों को हर अस्पताल में ऑफिस की जगह दी गई है। कई अधिकारी इस पर अपना विरोध भी जता चुके हैं। अलका लांबा को पांच अस्पतालों में समिति का अध्यक्ष बनाया गया है। इस मामले में भी इन 27 विधायकों का भविष्य खतरे में पड़ सकता है।

ऐसे जा सकती है आप की सरकार

दिल्ली में 67 विधायकों वाली आम आदमी पार्टी की सरकार के 21और २७ यानी 48 विधायकों पर अयोग्य होने का खतरा मंडरा रहा है। अगर ये किसी तरह अयोग्य घोषित होते हैं तो दिल्ली में ‘आप’ के विधायकों की संख्या 19 रह जाएगी। इस स्थिति में दिल्ली की दिल्ली की 48 सीटों पर उप चुनाव की स्थित आ सकती है। अब निर्भर करता है कि उप चुनावों में बीजेपी इन 48 सीटों पर कौन कितनी सीट जीत पाता है। यदि बीजेपी और कांग्रेस किसी तरह 30 सीटें आम आदमी पार्टी से हड़प लेती हैं तो दिल्ली में केजरीवाल के लिए दिल्ली की कुर्सी पर रहना मुश्किल हो जायेगा। दिल्ली में बहुमत के लिए 35 सीटों की जरूरत हैं और 30 सीटें जाने से आप बहुमत के आंकड़े 35 से नीचे आए जायेगी।

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