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अमूमन देखा गया है कि किसी भी शहर में दिन के समय ठीक-ठाक इतनी भीड़ तो होती ही होती है कि 12 किलोमीटर का सफर तय करने में लगभग पौन घंटे लग जाएं| ऐसे में ज़रा सोचिये अगर कभी किसी को कोई मेडिकल एमरजेंसी हो जाये और हॉस्पिटल आपके घर से दूर हो तो? ऐसा ही कुछ भोपाल में उस वक़्त देखने को मिला जब एक मरीज़ को जल्द से जल्द लीवर ट्रांसप्लांट की ज़रुरत पड़ गयी|5

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हॉस्पिटल में मरीज़ के परिजन और डॉक्टर्स लीवर के इंतज़ार में थे| उन्हे भी शायद किसी चमत्कार की ही उम्मीद हो, क्योंकि जिस लीवर का वो इंतज़ार कर रहे थे, वो उस वक़्त उनसे 12 किलोमीटर दूर था| ऐसे में लाज़मी था, कि सिर्फ कोई चमत्कार ही अब समय पर मरीज़ की मदद कर सकता है, लेकिन तभी हुआ कुछ ऐसा कि…

अगली स्लाइड में जाने आखिर कैसे अफसरों ने बस चंद मिनटों में ही तय कर लिया किलोमीटर का सफ़र और बचा ली मरीज़ की जान…

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