खुल गया अमिताभ बच्चन से जुड़ा वो राज़ जो उन्होंने आजतक सबसे छुपाया, आपको भी हैरान कर देगा ये सच!

ये बात तो आप जानते ही है कि अमिताभ बच्चन के दुनिया भर में अनेकों चाहने वाले है| जिस समय अमिताभ बच्चन ने फ़िल्मी दुनिया में कदम रखा था उसी समय से उन्होंने लाखों लोगो को अपना दीवाना बना लिया था| आज भी अमिताभ के फैन्स उनके बारे में नई-नई बातें जानने के इच्छुक रहते है, लेकिन जो बात आज हम आपको बताने जा रहे हैं वो यक़ीनन आपको नहीं पता होगी और उसे सुनकर आपको भी गहरा झटका लग सकता है|

आपको याद होगा कि साल 2005 के नवंबर महीने में अमिताभ बच्चन अपने स्वर्गीय पिता हरिवंशराय बच्चन की जयंती के अवसर पर अपने परिवार के साथ उतर-प्रदेश गए हुए थे, वहां उन्होंने एक समाहरोह में हिस्सा लिया लेकिन इसी बीच उन्हें पेट-दर्द शुरू हो गया और फिर उन्हें अस्पताल में भर्ती करवाना पड़ा था| उस ऑपरेशन में अमिताभ बच्चन की बड़ी आंत की अंतड़ियां सड़ चुकी थी| सड़ी अंतड़ियों को काट कर उन्हे जीवनदान दिया गया था|

लेकिन यहाँ हैरानी वाली बात ये थी कि इस तरह से अंतड़िया या तो शराब पीने वालों की, या नशा करने वालों की, या तो फिर सूअर का मांस खाने वालों की सड़ती हैं, जिसका मतलब साफ़ था कि…

अगली स्लाइड में जानिए सदी के महानायक अमिताभ बच्चन का वो काला सच जिससे आप आजतक बेखबर रहे हैं…

‘न गोली की मार से न तलवार की धार से, गुंडे डरते है सिर्फ बहनजी की सरकार से…

इस समय यूपी का चुनावी दंगल चरम पर हैl एसपी सुप्रीमो और मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की पत्नी डिंपल यादव समाजवादी पार्टी के स्टार प्रचारकों में से एक हैं और इन दिनों वह यूपी के सियासी अखाड़े में एसपी कैंडिडेट्स के प्रचार में लगी हुई हैं l इसी क्रम में डिंपल यादव कई जनसभाओं को संबोधित करते नज़र आईं, इन जनसभाओं में डिंपल यादव ने जनता से कई वादे भी किए लेकिन इस दौरान वो बार-बार अपने ही कार्यकर्ताओं से परेशान होती रहीं l

यूपी के सीएम अखिलेश यादव की पत्नी ‘डिंपल यादव की सुरक्षा’ विपक्षियों के लिए बड़ा मुद्दा बन गया है। इस मुद्दे को खराब कानून-व्यवस्था से जोड़कर कई विपक्षी पार्टियाँ लगातार हमले कर रही है। अपने कार्यकर्ताओं के बीच डिंपल भाभी के रुप में लोकप्रिय डिंपल यादव के साथ समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने उन्हें देखने, उनके साथ सेल्फी लेने और उनका वीडियो बनाने की धुन में उन्हें खूब परेशान किया l ऐसे में उन्हीं की पार्टी के कार्यकर्ताओं की बेहूदगी हरकत को ध्यान में रखते हुए अब प्रदेश के मुख्यमंत्री साहब क्या ज़वाब देंगे, यह तो आने वाला समय ही बतायेगा!

इलाहाबाद और जौनपुर में पार्टी के कार्यकर्ताओं द्वारा परेशान किये जाने पर डिंपल भाभी ने कई बार मंच से इशारा किया कि कार्यकर्ता मंच से दूर रहें लेकिन जब युवा कार्यकर्ता नहीं माने तो डिंपल ने उनमें से ज्यादा हुडदंग मचाने वालों की पहचान करनी शुरू कर दी और कहा “मैं भईया को आपके नाम दूंगी”

अगले पेज में देखें बीएसपी पार्टी की प्रमुख और अखिलेश यादव की बुआ मायावती नें अपनी बहु डिंपल पर कैसे किया वार..

कब सुधरेंगे राहुल गांधी, अपने बयानों को लेकर कब होंगे संजीदा?

राहुल गांधी अपने अटपटे बयानों के कारण हमेशा चर्चा में आ जाते हैं. कभी वो संसद में ऐसे बयान दे देते हैं कि बाकी लोग उनकी बातों को सुनकर लोटपोट हो जाते हैं तो कभी कुछ ऐसी बात बोल देते हैं जिसे लोग हज़म नहीं कर पाते. राहुल गांधी पहले कुछ कह देते हैं और फिर माफ़ी मांगते दिखते हैं। 

ऐसा ही एक बयान उन्होंने कारगिल शहीद की बेटी और वर्तमान में दिल्ली यूनिवर्सिटी की छात्रा गुरमेहर कौर को लेकर भी दिया है. गुरमेहर कौर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद् के खिलाफ है. उसने कुछ समय पहले बयान दिया था कि मेरे पिता को पाकिस्तान ने नहीं बल्कि जंग ने मारा है. शायद गुरमेहर कौर ये भूल गयी कि जिस जंग में उसके पिता शहीद हुए वो जंग शुरू किसने की थी.

अगले पेज पर जानें, क्या कहा राहुल गांधी ने  

कपिल शर्मा के ट्वीट को लेकर फिर से मचा बवाल !

कुछ दिन पहले द कपिल शर्मा शो के होस्ट कपिल शर्मा काफी चर्चा में थे, चर्चा भी इतनी कि हर कोई उन्हें निशाना बनाया l दरअसल पूरा मामला एक ट्वीट को लेकर था जिसमें कपिल शर्मा ने मोदी के अच्छे दिन पर निशाना साधा था, बस फिर क्या था सोशल मीडिया पर लोगों कपिल शर्मा की जमकर क्लास ली l सोशल मीडिया पर कपिल शर्मा को खूब खरी खोटी सुननी पड़ी थी l वैसे ये प्रकरण शांत ही हुआ था कि अभी हाल ही में एक शो में कपिल शर्मा ने कुछ ऐसा कह दिया कि इस मामले की चिंगारी को फिर से हवा मिल गयी और अब एक बार फिर से कपिल शर्मा सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बने हुए हैं l

आपको बता दें कि कपिल के पुराने ट्वीट के मामले में एक रिपोर्ट आई थी जिसमें लिखा था कि कपिल ने ऑफिस और घर बनाने के लिए जो जरुरी नियम होते हैं उन नियमों का पालन नहीं किया है l दरअसल जिस जगह पर कपिल शर्मा अपना ऑफिस बना रहे थे उस जगह का कॉमर्शियल इस्तेमाल नहीं हो सकता था l इस मामले में बीएमसी ने उन्हें एक नोटिस भेजा था और काम रोकने के लिए कहा था l लेकिन कपिल ने वो नोटिस को इग्नोर करते हुए ऑफिस निर्माण का काम जारी रखा l

अगल पेज पर पढ़िए कपिल ने मोदी पर किये गये ट्वीट पर ऐसा क्या कहा कि मचा हुआ है बवाल…

जब एक कलयुगी बाप ने अपने और अपने बेटी के पवित्र रिश्ते को किया तार-तार, बेटी ने रोते-रोते बताया कि कैसे हर रात…

आये दिन हमे महिलाओं के साथ हो रहे यौन उत्पीड़न के मामले सुनाई देते ही हैं| ऐसे में अगर खबर आये बाप के द्वारा अपनी ही बेटी के यौन उत्पीड़न का तो? जहाँ एक बाप फ़र्ज़ होता है की वह अपनी बेटी की बहुत ही जिम्मेदारी से परवरिश करे, उसे प्यार दे, उसके जीवन की हर कठिनाइयों में उसका साथ दे ऐसे में इन सब बातो से परे होकर एक कलयुगी पिता ने बाप-बेटी का रिश्ता शर्मशार कर दिया|
बाप बेटी के इसी पवित्र रिश्ते को शर्मसार करती हुई ये कहानी आरोन मध्यप्रदेश की है | आरोन पुलिस ने एक 48 वर्षीय व्यक्ति को उसकी बेटी के शिकायत के बाद गिरफ्तार किया है| यौन शोषण की शिकार बेटी ने पुलिस को बताया कि उसका पिता पिछले 2 वर्ष से शारीरिक शोषण कर रहा था जिसमे वो हर रात उसके साथ…

अगली स्लाइड में जानिए पीड़ित बेटी ने बतायी अपने शोषण से जुड़ी कुछ ऐसी दिल दहला देने वाली बातें जिसे सुनकर…

एक ऐसी जगह जहाँ अजीबो-गरीब प्रथा के चलते ‘निर्वस्त्र विवाह’ करते है लोग…

भारत में शादी 2 आत्माओं का मिलन ही नहीं होती बल्कि 2 परिवारों का भी मेल होता है 

शादी हर किसी के जीवन का एक महत्वपूर्ण पल होता हैl शादी वंशवृद्धि के साथ-साथ सामाजिक निर्वहन के लिए भी बहुत जरुरी होती हैl दुनियाभर में शादी को एक संस्कार के रूप में माना जाता हैl आप तो जानते ही हैं कि शादी स्त्री और पुरुष के बीच होती हैl

शादी हर व्यक्ति के जीवन में नए मोड़ लाती हैl शादी-विवाह हर इंसान की जिंदगी का महत्वपूर्ण हिस्सा है और हर देश में या अलग-अलग क्षेत्रों में विवाह की रीतियां अलग होती हैंl बंगाल में अलग, चीन में अलग, जापान में अलगl

हमारे देश में शादी में लाल जोड़े को काफी अहमियत दी जाती हैl और शादी से पहले ही कपड़ों की खरीदारी शुरू हो जाती हैl लेकिन क्या अपने कभी शादी की किसी ऐसी प्रथा के बारे में सुना है जिसमे नव-जोड़े निर्वस्त्र शादी करते होl जी हाँ आज हम आपको शादी की एक एेसी ही अजीबो-गरीब रीति के बारे में बतायेंगे जिसे सुन आप भी दंग रह जायेंगेl

आगे पढ़ें यहाँ निर्वस्त्र विवाह है लोकप्रिय जिसमे दूल्हा-दुल्हन करते है…

पीएम मोदी के घर पर एसपीजी की महिलाएं रात में ड्यूटी क्यों नहीं करना चाहतीं?

प्रधानमंत्री के घर और निजता से संबंधित ये कैसी खबर? इस बार के “शुक्रवार” (24 फरवरी – 02 मार्च 2017) मैग्जीन में एक गंभीर खबर है। पहले पेज पर प्रमुखता से प्रकाशित इस खबर का शीर्षक है, “फिर विवादों में घिरी एसपीजी” लेकिन यह प्रधानमंत्री निवास से संबंधित विवाद खड़ा कर रही है। खबर के मुताबिक एसपीजी की महिला सुरक्षा कर्मियों ने अपने आला अफसरों से गुहार लगाई है कि उन्हें रात की ड्यूटी पर न रखा जाए।

यहां यह गौरतलब है कि प्रधानमंत्री के घर में परिवार की कोई महिला सदस्य नहीं रहती है। आम जानकारी यही है कि प्रधानमंत्री अपने घर पर अकेले रहते हैं। ऐसे में भारतीय संस्कारों के लिहाज से महिला सुरक्षा कर्मियों की रात की ड्यूटी लगनी ही नहीं चाहिए। उन्हें अधिकारियों से गुहार लगाने की आवश्यकता ही क्यों पड़े? यही नहीं, खबर में आगे कहा गया है, “माना जा रहा है कि वे किसी विवाद का साक्षी बनना नहीं चाहती हैं।” यह और गंभीर है।

खबर में (टाइपिंग की कुछ गड़बड़ी है) कहा गया है कि एसपीजी के तत्कालीन निदेशक दुर्गा प्रसाद को हटा दिया गया था। हटाने की कोई वजह नहीं बताई गई थी। हालांकि जिस तरह से यह कार्रवाई की गई थी उसमें तमाम अटकलों को बल मिला था। इनमें एक अटकल यह भी थी कि दुर्गा प्रसाद चाहते थे कि प्रधानमंत्री से जो भी मिलने आए उसे कैमरों के सामने से गुजरना पड़े और उसका पूरा रिकार्ड रखा जाए। इसमें कोई बुराई नहीं है और यह जरूरी भी लगता है। पर उन्हें इसकी कीमत चुकानी पड़ी (और पद से हटा दिया गया)। खबर में यह नहीं लिखा है कि दुर्गाप्रसाद के बाद कौन निदेशक हैं और अब क्या होता है। ना ही अभी के निदेशक से कोई बातचीत की गई है।

खबर में आगे लिखा है, अब यह अफवाह जोर पकड़ रही है कि प्रधानमंत्री नहीं चाहते हैं कि उनके निवास में लगे कैमरे कमरों के अंदर नजर रखें। इसमें कोई बुराई नहीं है। अगर प्रधानमंत्री नहीं चाहते हैं तो शयन कक्षों में कैमरे नहीं होने चाहिए और दरवाजे तक को कैमरे की नजर में लाकर अंदर छोड़ा जा सकता है और इस पर कोई विवाद नहीं होना चाहिए। पर विवाद हैं औऱ महिलाएं रात में ड्यूटी करना नहीं चाहती हैं – सबको जोड़ कर देखिए तो एक बड़ी खबर बनती है। अगर अधिकृत खबर नहीं छपी तो तरह-तरह की अफवाहें उड़ती रह सकती हैं और प्रधानमंत्री के घर के बारे में ऐसी खबरें, जैसे अंदर जाने वालों के लिए कैमरा नहीं है – सुरक्षा की दृष्टि से खतरनाक है।

जानिये क्या खास हैं इस इंसान में, जो प्रधानमंत्री भी सब काम छोड़ कर कोंयमबटृर पहुंच गये !

यूनाइटेड हिन्दी विशेष : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने उत्तर प्रदेश जैसे महत्वपूर्ण चुनावी कार्यक्रम में से समय निकाल 112 फिट ऊंची शिव प्रतिमा का अनावरण करने कोंयमबटृर गए तो जरूर कोई बात रही होगी। दरअसल, जिस शख्स के सौजन्य से ये सब हो रहा था उसका नाम हैं जग्गी सद्गुरु वासुदेव। ये शख्स देखने और बोलने में जितना साधरण नजर आता है उससे कहीं अधिक असाधरण उनका व्यक्तित्व है।

आप इसी से उनकी प्रतिभा का अंदाजा लगा लीजिए कि जग्गी सद्गुरु वासुदेव को संयुक्त राष्ट्र के आर्थिक और सामाजिक परिषद में विशेष सलाहकार की पदवी प्राप्त है। उनका संस्थान ईशा फाउंडेशन भारत सहित संयुक्त राज्य अमेरिका, इंग्लैंड, लेबनान, सिंगापुर और ऑस्ट्रेलिया में योग कार्यक्रम सिखाता है।

यही नहीं जब देश में गौमांस को लेकर बहस हुई तो जग्गी सद्गुरु वासुदेव ही वह अकेले शख्स थे जिन्होंने वैज्ञानिक और आध्यात्मिक तरीके से गौमांस खाने का न केवल खंडन किया बल्कि वैज्ञानिक तर्क देकर इससे होने वाले नुकसान भी बताए। उनके तर्कों के बाद कई दिग्गज जो गौ मांस खाने को लेकर अपने तर्क दे रहे थे बैकफुट पर आ गए थे। उनमें चर्चित पत्रकार बरखा दत्त भी शामिल है।

आपको बता दें कि जग्गी सद्गुरु वासुदेव का आईटी और मेडिकल आदि क्षेत्रों में काम करने वाले लोगों पर बहुत प्रभाव है। यह न केवल भारत में बल्कि दुनिया भर में लोग उनके योग और उनकी आध्यात्मिक बातों के दीवाने हैं। जग्गी सद्गुरु वासुदेव की शख्सियत का अंदाजा इस बात से ही लगाया जा सकता है कि पूरे तमिलनाडु को हरा भरा करने का बीड़ा उठाया हुआ है। यहां वे लगभग 16 करोड़ पेड़ लगाने की परियोजना चला रहे हैं। उनके संगठन ने 17 अक्टूबर 2006 को तमिलनाडु के 27 जिलों में एक साथ 8.52 लाख पौधे रोपकर गिनीज विश्व रिकॉर्ड बनाया था।

अगले पेज पर पढ़े सद्गुरु के बारे में क्या योगदान हैं उनका भारतीय संस्कृति में ?

जानिये क्या खास हैं इस इंसान में, जो प्रधानमंत्री भी सब काम छोड़ कर कोंयमबटृर पहुंच गये !

यूनाइटेड हिन्दी विशेष : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने उत्तर प्रदेश जैसे महत्वपूर्ण चुनावी कार्यक्रम में से समय निकाल 112 फिट ऊंची शिव प्रतिमा का अनावरण करने कोंयमबटृर गए तो जरूर कोई बात रही होगी। दरअसल, जिस शख्स के सौजन्य से ये सब हो रहा था उसका नाम हैं जग्गी सद्गुरु वासुदेव। ये शख्स देखने और बोलने में जितना साधरण नजर आता है उससे कहीं अधिक असाधरण उनका व्यक्तित्व है।

आप इसी से उनकी प्रतिभा का अंदाजा लगा लीजिए कि जग्गी सद्गुरु वासुदेव को संयुक्त राष्ट्र के आर्थिक और सामाजिक परिषद में विशेष सलाहकार की पदवी प्राप्त है। उनका संस्थान ईशा फाउंडेशन भारत सहित संयुक्त राज्य अमेरिका, इंग्लैंड, लेबनान, सिंगापुर और ऑस्ट्रेलिया में योग कार्यक्रम सिखाता है।

 

यही नहीं जब देश में गौमांस को लेकर बहस हुई तो जग्गी सद्गुरु वासुदेव ही वह अकेले शख्स थे जिन्होंने वैज्ञानिक और आध्यात्मिक तरीके से गौमांस खाने का न केवल खंडन किया बल्कि वैज्ञानिक तर्क देकर इससे होने वाले नुकसान भी बताए। उनके तर्कों के बाद कई दिग्गज जो गौ मांस खाने को लेकर अपने तर्क दे रहे थे बैकफुट पर आ गए थे। उनमें चर्चित पत्रकार बरखा दत्त भी शामिल है।

आपको बता दें कि जग्गी सद्गुरु वासुदेव का आईटी और मेडिकल आदि क्षेत्रों में काम करने वाले लोगों पर बहुत प्रभाव है। यह न केवल भारत में बल्कि दुनिया भर में लोग उनके योग और उनकी आध्यात्मिक बातों के दीवाने हैं। जग्गी सद्गुरु वासुदेव की शख्सियत का अंदाजा इस बात से ही लगाया जा सकता है कि पूरे तमिलनाडु को हरा भरा करने का बीड़ा उठाया हुआ है। यहां वे लगभग 16 करोड़ पेड़ लगाने की परियोजना चला रहे हैं। उनके संगठन ने 17 अक्टूबर 2006 को तमिलनाडु के 27 जिलों में एक साथ 8.52 लाख पौधे रोपकर गिनीज विश्व रिकॉर्ड बनाया था।

अगले पेज पर पढ़े सद्गुरु के बारे में क्या योगदान हैं उनका भारतीय संस्कृति में ?

ब्लॉग: कलिखो पुल की आत्महत्या और सेकुलर दोगलेपन की इन्तेहा

ब्लॉग: ( अभिजीत सिंह ) यूनाइटेड हिन्दी स्पेशल :- उषाकालीन सूर्य का भारत में प्रथम स्वागत करने वाला राज्य अरुणाचल लगभग पूरा पहाड़ी प्रदेश है। इस राज्य पर ईश्वर की विशेष अनुकंपा का पता इस बात से चलता है कि राज्य की लगभग दो-तिहाई आबादी जहाँ सघन वनों से आच्छादित है जिनमें एक से एक दुर्लभ वृक्ष हैं वहीं इस राज्य के पास प्रचुर जल-संसाधन भी है। इसके अलावा प्रकृति ने इस राज्य को जनजातीय विविधताओं से भी सजाया है। यहाँ कई जनजातियाँ निवास करतीं हैं जिनमें लगभग हरेक की अपनी विशिष्ट भाषा, संस्कृति, परम्परायें और रीति-रिवाज हैं।

( अंग्रेजों के आगमन के पहले पूर्वोत्तर भारत के आदिवासी ब्रह्मवादी अथवा प्रकृतिपूजक थे । असंदिग्ध रूप से इस क्षेत्र में मिशनरी के प्रभाव में इसाई धर्म का प्रसार हुआ । कहा जाता है कि ईस्ट इंडिया कंपनी इस क्षेत्र में व्यापार से अधिक रूचि इसाई धर्म के प्रसार में लेती थी । आदिवासियों को शिक्षित और सभ्य बनाना तो एक बहाना था, असली उद्देश्य तो ईसाइयत का प्रसार करना था । आंकड़े देखने के बाद एक आश्चर्यजनक तथ्य उजागर होता है कि आज़ादी के बाद पूर्वोत्तर में इसाई धर्म के प्रसार में और तेजी आई। )

इन सबसे ऊपर अरुणाचल की सबसे बड़ी खासियत ये है कि पूरे पूर्वोत्तर में यह सबसे शांत प्रदेश है और भारत को कभी भी यहाँ के लोगों की तरफ से अलगाववादी मानसिकता का सामना नहीं करना पड़ा पर ईसाई (कसाई) मिशनरी इस राज्य पर भी कहर बनकर टूटे। जब यहाँ भी ईसाई मिशनरी गतिविधियाँ बढ़ने लगी और यहाँ के लोगों को लगने लगा कि हमें भारत से अलग करने और हममें अलगाववादी मानसिकता विकसित करने की कोशिश हो रही है तो वहां लोगों ने मिशनरियों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। कई चर्च पर हमले हुए और मिशनरियों को अरुणाचल से निकल जाने को कहा गया। इसके बाद वहां छद्म सेकुलर राजनीति का असली खेल शुरू हुआ, लोकसभा सांसद रानो साईजा और मारग्रेट अल्वा (दोनों ईसाई) दोनों ने अरुणाचल में अपना डेरा डाल दिया और छद्म सेकुलर प्रेस का इस्तेमाल कर एक छोटी घटना को बड़ा बनाकर दुनिया भर में इस रूप में कहकर प्रचारित किया कि अरुणाचल के लोग कितने हिंसक है।

उतने इस कुकृत्य ने अरुणाचल के राष्ट्रवादी नेताओं को आग-बबूला कर दिया। उस समय पी० के० थुंगन अरुणाचल के राष्ट्रपति और श्री के० ऐ० ऐ० राजा वहां के उप-राज्यपाल थे। इन दोनों ने स्पष्ट ऐलान कर दिया कि अरुणाचल की हिन्दू संस्कृति के साथ किसी भी तरह की छेड़छाड़ बर्दाश्त नहीं की जायेगी। फौरन अरुणाचल सरकार ने राज्यपाल के सहयोग से वहां “अरुणाचल प्रदेश इनडीजिनस फेथ बिल” नाम से एक धर्मांतरण विरोधी कानून पास करवाया। जैसे ही ये कानून पास हुआ मानो पूर्वोत्तर के राज्यों में भूचाल आ गया। शिलांग (जो उत्तर पूर्व में उस समय ईसाईकरण का केंद्र था) से लेकर मिजोरम और कोहिमा से लेकर इम्फाल तक विरोध प्रदर्शन शुरू हो गये। वायस ऑफ़ अमेरिका, बी० बी० सी०, स्पेन और ऑस्ट्रेलिया के समाचारपत्र अरुणाचल के ख़बरों से पट गये। भारत में भी जगह-जगह छद्म सेकुलर पार्टियाँ और मीडिया इस खबर को इस रूप में दिखाने लगी मानो अरुणाचल से अधिक असहिष्णुता कहीं है ही नहीं!

अरुणाचल के लोग इस विश्वव्यापी विशाल ईसाई नेटवर्क का प्रसार देखकर हक्के-बक्के रह गये, उन्हें समझ ही नहीं आया कि ये वही मीडिया और वही लोग हैं जिन्होंने चीन हमले के दौरान भी अरुणाचल को ठीक से कवर नहीं किया था और आज धर्मांतरण विरोधी कानून पास होते ही इतने सक्रिय हो गये कि पूरी दुनिया में अरुणाचल को बदनाम कर दिया।

बहरहाल अरुणाचल के हिम्मती नेताओं ने इन विरोध प्रदर्शनों की जरा भी परवाह न की और धर्मांतरण विरोधी कानून को वापस नहीं लिया। ऐसा नहीं है कि इस बिल के बाद अरुणाचल में ईसाईकरण के प्रयास नहीं हुये, हुये, कैसे हुये ये किसी और पोस्ट में लिखूँगा पर आज इस घटना के स्मरण का हेतू ये है कि हाल में अरुणाचल प्रदेश के पूर्व मुख्यमन्त्री स्वर्गीय कलिखो पुल ने आत्महत्या कर ली थी। कलिखो पुल पिछले वर्ष काँग्रेस से विद्रोह कर भाजपा के समर्थन से अरुणाचल के मुख्यमन्त्री बने थे और माननीय सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में उनकी सरकार को अवैध करार दिया गया था। इस घटना के बाद से ही कलिखो पुल गहरे अवसाद में चले गये थे और अंततः उन्होंने आत्महत्या कर ली थी। आत्महत्या से पहले उन्होंने जो लम्बा पत्र लिखा था उसे जी न्यूज़ को छोड़कर देश की किसी भी भ्रष्ट मीडिया ने संज्ञान में लेना उचित नहीं समझा। ( आश्चर्य की बात है कि कलिखो पूल ने अपने 60 पेज के सूसाइड नोट मे अपनी आत्म हत्या के लिए जिम्मेदार सरकारी तंत्र के अलावे सर्वोच्च न्यायपालिका पर भी आरोप लगाया है। इसके वावजूद भी जी न्यूज छोड़ कर किसी भी चैनल ने कोई समाचार नहीं दिया। )

सोचिये अगर भारत के किसी और राज्य के एक पूर्व- मुख्यमंत्री ने अगर आत्महत्या की होती तो क्या उस खबर को भी ये दोगली मीडिया इसी तरीके से इग्नोर कर देती ?

आधे-पौने राज्य के एक अराजक नेता की मामूली नौटंकी को भी जो मीडिया रात-रात भर दिखाती है उसके लिये एक राज्य के मुख्यमंत्री का आत्महत्या करना सिर्फ एक मामूली खबर है।

सेकुलर (दोगले) चाहे तो दलील दे सकतें हैं कि चूँकि अरुणाचल सूदूर प्रदेश है व लोग उसके बारे में ज्यादा नहीं जानते तो उस राज्य के अधिक समय देना मीडिया के उचित नहीं था । फिर हमारा सवाल ये है कि आज से चालीस साल पहले इसी मीडिया ने और इन्हीं छद्म सेकुलरों ने “अरुणाचल प्रदेश इनडीजिनस फेथ बिल” के विरोध में जो अपनी अखबारें रंगी थी और सारी दुनिया में चीख-चीख कर अरुणाचल को बदनाम किया था वो क्या था और क्यों था ?

आये दिन संघ परिवार को सदभावना की नसीहत देते हुए उसे भारत की एकता के लिये खतरा बताने वाली बिकी हुई मीडिया और छद्म सेकुलरों के इस चरित्र को दोगलेपन की इन्तेहा के रूप में क्यों न देखा जाये ?