ऐसे बहुत से आतंकवादी इसी फेसबुक पर हमारे आस पास भी हैं। पहचानिये, सावधान रहिये।

ब्लॉग : Sharad Shrivastav :- पिछले कुछ दिनों से बंगाल के बारे में एक खबर लगातार अखबारों में छप रही है। खबर छोटी है और कहीं पर भी चर्चा में नहीं आयी। कुछ दिन पहले 17 या 18 जनवरी को बंगाल के 24 परगना जिले में सरकार द्वारा जमीन अधिग्रहण का विरोध कर रहे ग्रामीणों पर पुलिस फायरिंग में 2 लोग मारे गए।मामूली खबर जिसमे किसी की रूचि नहीं हुई। देश में दर्जनों लोग रोज मारे जा रहे हैं। फिर ऐसी घटना का संज्ञान क्यों लिया जाए।

खैर ……..
कहानी कुछ यूँ है की कुछ साल पहले एक योजना बनी। जिसमे फरक्का बिजलीघर से बिजली की सप्लाई बिहार के कुछ औद्योगिक इलाकों में की जानी थी। इसके लिए पॉवर ग्रिड को ट्रांसिमिशन लाइन बिछानी थी। और कुछ पावर सब स्टेशन बनाने थे। ऐसे तमाम पावर स्टेशन में से एक बंगाल के 24 परगना जिले के बांगुर में बनना था। करीब दो साल पहले बंगाल की ममता सरकार ने इस गांव में 16 एकड़ जमीन अधिग्रहित की। इस जमीन में पावर सब स्टेशन और वहां के लोगों के लिए घर बनने थे। 16 एकड़ वैसे कोई बहुत बड़ी जगह होती भी नहीं है।ये जमीन कृषि जमीन थी। किसानों को सरकार ने ठीक से कंपनसेशन भी दिया। प्रोजेक्ट सरकारी था। कहीं कोई दिक्कत नहीं थी। पावर ग्रिड ने निर्माण का काम शुरू कर दिया।

लेकिन फिर दिक्कत आयी
एक नामालूम सा संगठन भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी ( माले) ( रेड स्टार) के कुछ कार्यकर्त्ता उस गांव में पहुंचे। सीपीआई या भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी एक संसदीय संघटन है। सीपीआई ( माले) पहले बिहार में एक नक्सल संगठन था , लेकिन हिंसा छोड़कर वो अब संसदीय पार्टी बन चुका है। सीपीआई माले ( रेड स्टार) एक नया संगठन है जो कहने को इनकी तरह ही संसदीय पार्टी है। लेकिन उसके तार माओइस्ट संगठनों से नक्सल आतंकवादियो से भी जुड़े हैं।

सीपीआई माले रेड स्टार के कार्यकर्ताओ ने किसानों ग्रामीणों को भड़काना संगठित करना शुरू किया। ग्रामीणों को समझाया गया की ये पावर सब स्टेशन नहीं पावर प्लांट बनाने की योजना है। जिसमे लाखों वोल्ट बिजली होगी जो आस पास की फसलो को तबाह कर देगी। लोगों के स्वास्थ्य को नुक्सान पहुंचाएगी।

The effects of the electromagnetic fields generated by this massive power plant on human health, livelihood, and ecology have not been taken into account. These effects will cause havoc on the livelihoods of the people. उपरोक्त लाइने उस दुष्प्रचार का हिस्सा हैं जो बंगाल के ग्रामीणों को समझाई गयी। एक मामूली पावर सब स्टेशन को इन लोगों ने मैसिव पावर प्लांट में बदल दिया। और फिर इस महीने की शुरुआत में ग्रामीणों ने अपना विरोध शुरू किया। विरोध की खबर पाते ही ममता सरकार ने पावर ग्रिड को काम रोकने का आदेश दिया। सरकारी अधिकारियों और ग्रामीणों की बैठक हुई , जिसमे सरकारी अधिकारियों ने ग्रामीणों को वस्तुस्थिति समझाने का प्रयास किया।

लेकिन गांव वालों ने जमीन वापस करने की मांग रखी और पावर सब स्टेशन को गांव से हटाने को कहा। जाहिर था की ये मांगे सरकार नहीं मान सकती थी , न ही मानी जानी चाहिए।

खैर ममता सरकार ने इस विरोध के मुखिया को पुलिस द्वारा रात में उठवा लिया। जिसके नतीजे में अगले दिन ग्रामीणों ने सड़क रोक कर विरोध शुरू किया। सरकार ने भारी पुलिस बल को भेजा ताकि रास्ता खुलवाया जा सके। ग्रामीणों और पुलिस में हिंसक संघर्ष हुआ। दो ग्रामीण गोली लगने से मारे गए , दर्जनों गांव वाले और पुलिस वाले घायल हुए। तमाम वाहन जिसमे पुलिस के वाहन भी थे आग के हवाले हो गए।

इसके बाद मामले का राजनीतिकरण हुआ
प्रसंगवश उसी समय कलकत्ता के साल्ट लेक में बंगाल ग्लोबल इन्वेस्टर मीट चल रही थी जिसमे विदेश और देसी दोनों तरह के बड़े लोग आये हुए थे। सीपीआई के नेताओ और कार्यकर्ताओ ने इन्वेस्टर मीट के वेन्यू के बाहर कड़ा विरोध प्रदर्शन किया। जवाब में ममता सरकार ने उन सभी लोगों को गिरफ्तार कर लिया। सीपीआई ने ममता सरकार पर किसानों की जमीन लूटने का आरोप लगाया। जवाब में ममता ने सीपीआई को सिंगुर याद दिलाया। सिंगूर में सीपीआई सरकार द्वारा किये गए जुल्मो की याद दिलाई। कांग्रेस ने ममता सरकार पर किसान मजदूर विरोधी होने का आरोप लगाया।

और मैं सोच रहा था की मोदी सरकार अम्बानी अडानी की सरकार है। यही दो साल पहले यही पार्टियां मोदी सरकार पर जमीन अधिग्रहण कानून को लेकर बड़े बड़े आरोप लगा रही थीं। बेसिकली इसी विधेयक के बाद मोदी सरकार को बौद्धिकों ने अम्बानी अडानी की सरकार घोषित किया था। लेकिन एक बेसिक बात पर तब भी और आज भी कोई ध्यान नहीं देता की जमीन राज्य सरकार अधग्रहीत करती है और केंद्र सरकार मॉडल कानून बनाती है। हर राज्य के जमीन अधिग्रहण के कानून अलग हो सकते हैं , होते हैं।

खैर कहानी अभी खत्म नहीं हुई। कुछ दिनों पहले सीपीआई माले रेड स्टार के एक बड़े नेता केरल से कलकत्ता पहुंचे और पहुँचते ही रेलवे स्टेशन से किडनैप हो गए। तीन दिन बाद वो दिल्ली में मिले। उन्होंने बताया की उन्हें कुछ इंटेलिजेंस के लोगों ने उठा लिया था। दो दिन पूछताछ के बाद उन्हें दिल्ली राजधानी एक्सप्रेस ट्रेन में बिठाकर छोड़ दिया गया। इन साहब ने किडनैपिंग का आरोप ममता दी पर लगाया , मोदी सरकार पर नहीं। गांव अभी भी जल रहा है। गांव की सीमा पर ग्रामीण पहरा दे रहे हैं सिर्फ पत्रकारों को गांव में जाने दिया जा रहा है। इस सीमा के दूसरी तरफ भारी मात्रा में पुलिस बल तैनात है। सिर्फ एक चिंगारी की जरूरत है। और इस चिंगारी को सुलझाने के लिए तमाम एक्टिविस्ट , नक्सली और माओवादी वहां मौजूद हैं।

आतंकवाद सिर्फ इस्लामिक नहीं होता , बौद्धिक आतंकवाद भी होता है। ज्यादा निर्मम , ज्यादा खतरनाक। जो लोगों को भड़का रहा है। सिस्टम और सरकार के खिलाफ कर रहा है। ऐसे बहुत से आतंकवादी इसी फेसबुक पर हमारे आस पास भी हैं। पहचानिये , सावधान रहिये।

ओवैसी व ठाकरे ने पीएम मोदी को ललकारा, पद्म पुरस्कार पर उठाए ये बड़े सवाल

पद्म पुरस्कारों पर विवाद, उद्धव ठाकरे और ओवैसी ने उठाए सवाल

यूनाइटेड हिन्दी : पद्म विभूषण पुरस्कार एक बार फिर विवादों में हैं। शरद पवार और मुरली मनोहर जोशी को पद्म भूषण दिए जाने की घोेषणा के बाद कई सवाल उठ रहे हैं। शिवसेना अध्यक्ष उद्धव ठाकरे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधते हुए कहा कि एनसीपी प्रमुख शरद पवार को पद्म विभूषण से सम्मानित किया जाना क्या ‘गुरुदक्षिणा’ है? उद्धव ने कहा मुझे समझ नहीं आ रहा कि क्या यह (पद्म विभूषण) गुरुदक्षिणा के तौर पर दिया गया है? क्या दक्षिणा पुरस्कार के रूप में भी दी जाती है?’

वहीं एमआईएम नेता और सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने डॉ मुरली मनोहर जोशी को पद्म विभूषण पुरस्कार दिए जाने के मोदी सरकार के फैसले पर सवाल उठाए हैं । ओवैसी ने भाजपा पर हिंदुत्व की राजनीति करने का आरोप लगाया है। ओवैसी ने कहा डॉ मुरली मनोहर जोशी बाबरी मस्जिद विध्वंस मामले के आरोपी हैं इसके बावजूद उन्हें पद्म विभूषण सम्मान दिया जाना भाजपा की हिंदुत्व विचारधारा को दर्शाता है।

गौरतलब है कि केंद्र सरकार ने बुधवार को पद्म पुरस्कारों ने नामों की घोषणा की थी. इसमे इनसीपी प्रमुख शरद पवार, बीजेपी नेता मुरली मनोहर जोशी, आध्यात्मिक गुरु जग्गी वासुदेव, टीम इंडिया के कप्तान विराट कोहली, जिम्नास्ट दीपा करमाकर, निरंजनानंद सरस्वती, बलवीर दत्त समेत 89 हस्तियों को पद्म सम्मान प्रदान किए जाने की घोषणा की गई थी। अब इन नामों पर विवाद खड़ा हो रहा है।

बजट 2017: किसानों को मिल सकती हैं ये बड़ी सौगातें, 1 फरवरी को होगी घोषणा

कृषि क्षेत्र को बजट से उम्मीदें (Graphic- Jyoti Desale)

नई दिल्ली। वित्त मंत्री अरुण जेटली 1 फरवरी को वित्तीय वर्ष 2017-18 के लिए अपने बजट का पिटारा खोलेंगे। उनके इस पिटारे की ओर पूरा देश आस लगाए बैठा है। पाँच राज्यों में विधानसभा चुनावों को देखते हुए इस बजट के लोक-लुभावन होने की संभावना ज्यादा है। हालांकि चुनाव आयोग ने सुनिश्चित किया है कि फिलहाल इस बजट में पाँच राज्यों से जुड़ी स्कीमों की घोषणाएँ नहीं की जाएंगी। केंद्रीय बजट से सबसे ज्यादा आशावान कृषि क्षेत्र है। देश के किसानों को उम्मीद है कि यह पिटारा उनकी मुश्किलों को कम करेगा।

नोटबंदी के फैसले के बाद जो तबक़े सबसे ज्यादा प्रभावित हुए उनमें किसान भी शामिल थे। फसलों की बुआई पिछड़ गई तो अभी भी समय से खाद और बीज की व्यवस्था का संघर्ष जारी है। अनाज की बिक्री को लेकर भी कोई बेहतर ढाँचागत व्यवस्था नहीं की गई है। देश का अन्नदाता आज भी तमाम मुश्किलों का सामना करता है। प्रतिवर्ष हज़ारों अन्नदाता आज भी आत्महत्या करने को मजबूर हैं। नरेंद्र मोदी कैबिनेट पर ‘सूट-बूट की सरकार’ होने के जुमले भी उछाले जाते रहे हैं। ऐसे में वित्त मंत्री अरुण जेटली 2017-18 के बजट में किसानों के लिए कुछ नई घोषणाएँ करके ये दाग धोना चाहेंगे।

पिछले बजट में किसानों को क्या मिला…?
वित्त मंत्री अरुण जेटली ने साल 2016-17 का बजट पेश करते हुए किसानों के लिए फसल बीमा योजना जैसी महत्वाकांक्षी स्कीम की घोषणा की थी। फसल बीमा के लिए सरकार ने बजट में 5500 करोड़ रुपए आवंटित किए थे। 9 लाख करोड़ रुपए किसानों को कर्ज़ उपलब्ध करवाने के लिए आवंटित किए गए थे। इसके अलावा सरकार ने कृषि क्षेत्र में 100 प्रतिशत एफडीआई की घोषणा भी की थी। सरकार ने इन घोषणाओं को अपनी उपलब्धि के तौर पर प्रचारित भी किया। इस बजट में किसानों को कुछ और बड़ी घोषणाओं की उम्मीद है। पिछले बजट के कुछ प्रमुख बिंदु…

  1. कृषि और किसान कल्याण के लिए कुळ आवंटन 35984 करोड़
  2. देश के 28.5 लाख हेक्टेयर भूमि को सिंचाई के तहत लाने की घोषणा
  3. तीन वर्ष की अवधि में जैविक खेती के अंतर्गत पाँच लाख एकड़ भूमि को लाया जाना
  4. नाबार्ड में समर्पित सिंचाई फंड को 20 करोड़ किया जाना
  5. प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण योजना पायलट आधार पर उर्वरक सब्सिडी के वितरण के लिए लागू किए जाने की घोषणा
  6. परम्परागत कृषि विकास योजना के तहत जैविक खेती को पांच लाख एकड़ लाना

बजट 2017-18 से कृषि क्षेत्र को क्या हैं उम्मीदें…?

  1. केंद्रीय बजट 2017 नोटबंदी के बाद का पहला बजट है। सरकार इसमें कैशलेस ट्रांजेक्शन को बढ़ावा देने के उपाय कर सकती है। पेमेंट बैंक के जरिये कामकाज पर भी बजट में राहत के उपाय हो सकते हैं।
  2. नोटबंदी के बाद नकदी की कमी की वजह से बहुत से किसान अपनी फसल नहीं बेच पाए। बजट से उम्मीद है कि उन किसानों को इससे राहत देने की कोशिश की जाएगी जिनके लिए रबी सीजन निराशाजनक रहा है। ग्रामीण इलाकों में कैशलेस ट्रांजेक्शन को बढ़ावा देने के लिए भी कुछ प्रावधान किये जा सकते हैं। इससे किसानों के लिए खाद-बीज खरीदना आसान होगा।
  3. रासायनिक के इस्तेमाल से लगातार फसलों की उर्वरक क्षमता घटती जा रही है। पिछले साल की तरह इस बजट में भी सरकार को जैविक खेती को बढ़ावा देना वाली घोषणाएं किए जाने की उम्मीद है।
  4. किसानों की कर्ज़माफी के लिए सरकार क्या कदम उठाती है इस पर भी सभी की उम्मीदें होंगी।

गणतंत्र दिवस पर यूएई के शहजादे बतौर मुख्य अतिथि आए, तो पाकिस्तानी मीडिया बौखलाई

गणतंत्र दिवस के मौके पर यूएई के शहजादे मोहम्मद बिन जयाद अल नाहयान बतौर मुख्य अतिथि आए, तो पाकिस्तानी मीडिया बौखलाई

UNITED HINDI VIDEO : हिंदुस्तान के 68वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर पहली बार संयुक्‍त अरब अमीरात की सेना ने भी परेड में हिस्‍सा लिया। यूएई के सशस्त्र बलों के डिप्टी सुप्रीम कमांडर औऱ अबू धाबी के शहजादे मोहम्मद बिन जायेद अल नाहयान गणतंत्र दिवस परेड पर मुख्य अतिथि थे। यूएई की तीनों सेनाओं के 144 सैनिकों ने परेड में हिस्सा लिया। जिसके कारण इस गणतंत्र दिवस की परेड और भी खास हो गई। लेकिन भारत और यूएई के बीच होते ये मजबूत रिश्तें से पाकिस्तानी मीडिया के पेट में दर्द शुरू हो गया।

दरअसल सउदी अरब की तरह संयुक्त अरब अमीरात पाकिस्तान का सहयोगी रहा है, लेकिन सुरक्षा और आतंकवाद के मसले पर दोनों देश अब भारत के पास आ चुके हैं। दोनों देशों के बीच डिफेंस, सिक्योरिटी, आईटी सर्विस और हाईवे प्रोजेक्ट से जुड़े 14 समझौते हुए हैं। ऐसे जब गणतंत्र दिवस की परेड में शाही मेहमान अबू धाबी के राजकुमार और यूएई के डिप्टी सुप्रीम कमांडर शेख मोहम्मद बिन जायद आये तो पाकिस्तानी मीडिया को मानो मिर्ची ही लग गई। तभी तो उन्होंने अपने शो में भारत और यूएई की बीच बढती नजदीकियों पर निशाना साधना शुरू कर दिया।

अगले पृष्ठ पर विडियो देखिये 

पेप्सी-कोक को भारत से भगाने के लिए तमिलनाडु से अभियान की हुई शुरुआत…

पेप्सी-कोक के खिलाफ तमिलनाडु से जागरण की शुरुआत…

यूनाइटेड हिन्दी : तमिलनाडु ट्रेडर्स एसोसिएशन के सभी व्यापारी एक मार्च से पेप्सी और कोक के सभी उत्पादों का बहिष्कार करने जा रहे हैं। सभी व्यापारी संगठनों ने एक बैठक में निर्णय लिया है कि पेप्सी-कोक के उत्पादों को नहीं बेचा जाएगा। यूनाइटेड हिन्दी ही जमीनी रिपोर्टर से खबर है कि विभिन्न माध्यमों द्वारा जनजागरण फैलाए जाने तथा पेयजल एवं भूमिगत जल की स्थिति दिनोंदिन ख़राब होने के बाद से जनता में इन कंपनियों के खिलाफ रोष बढ़ता जा रहा है। व्यापारियों ने यूनाइटेड हिन्दी संवादाता मनीष शर्मा से कहा है कि ये दोनों कम्पनियां तमिलनाडु में भूजल का अंधाधुंध दोहन कर रही हैं, जिस कारण भूजल का स्तर बहुत नीचे चला गया है। व्यापारियों के इस निर्णय से केवल तमिलनाडु में ही इन कंपनियों को लगभग 1400 करोड़ रूपए का नुक्सान होने की संभावना व्यक्त की जा रही है। यदि व्यापारी और जनता एक कदम और आगे बढ़ाकर, पेप्सी-कोक के आलू चिप्स भी बेचना बंद कर दें तो यह नुक्सान और अधिक गहरा सकता है।

तमिलनाडु व्यापारी एसोसिएशन में छोटे-बड़े सभी मिलाकर 15,000 व्यापारी हैं, जबकि दुसरे व्यापारी संगठन भी इस मुहीम से जुड़ते चले जा रहे हैं। तमिलनाडु में पेप्सी का मार्केट शेयर 60% है, कोक का लगभग 30% और बाकी के शीतल पेयों का 10% दोनों ही कम्पनियों ने तमिल फिल्म इंडस्ट्री के बड़े-बड़े सितारों को विज्ञापन हेतु अनुबंधित कर रखा है। पेप्सिको कम्पनी के तमिलनाडु में सात बड़े-बड़े प्लांट हैं, जबकि कोक के पांच प्लांट हैं…. जिनमें लाखों गैलन पानी रोजाना पेप्सी निर्माण के लिए उपयोग किया जाता है, तथा लगभग इतना ही पानी बेकार भी जाता है।

ताजा कमेन्ट : Prashant Sen : मुझे तो साउथ इंडियंस ज्यादा जागरूक लगते है। नार्थ इंडियंस से ज्यादा साउथ इंडियंस अपने कल्चर को समझते है और संम्मान करते है। जल्लीकट्टू वाले प्रकरण से ये प्रमाणित होता है। बाकि भारत में भी सभी को एकजुट हो कर इन कंपनियों के खिलाफ खड़े होना चाहिए ।

सनद रहे कि इससे पहले केरल हाईकोर्ट भी इन दोनों महाकाय कंपनियों को भूजल के अत्यधिक दोहन को लेकर केरल से बाहर का रास्ता दिखा चुका है, परन्तु इन कंपनियों द्वारा उच्च स्तर पर सांठगाँठ करके उच्चाधिकारियों को रिश्वत खिलाकर बड़े पैमाने पर धांधलियाँ की जाती हैं। न तो दोहन किए जाने वाले भूजल का कोई हिसाब होता है और ना ही ये कम्पनियां बारिश में भूजल को रीचार्ज करने के कोई ठोस उपाय करती हैं। इस कारण जमीन में पानी का स्तर तेजी से घट रहा है और उधर तमिलनाडु और कर्नाटक आपस में कावेरी के पानी को लेकर भिड़े हुए रहते हैं। गरीब किसान पिसता रहता है, जबकि शहरी जनता को पीने का पानी महंगे दामों पर खरीदना पड़ता है। इन दोनों ही महाकाय कंपनियों पर जितनी जल्दी और जितनी प्रभावी लगाम कसी जाए उतना ही बेहतर होगा। तमिलनाडु के व्यापारी और जनता तो जाग रहे हैं, क्या बाकी भारत में भी ऐसा होगा ?

अगले पृष्ठ पर पढ़िये : आप को कभी आश्चर्य हुआ कि कोका कोला वास्तव में क्या है ? नही ?

दया भाभी का ‘प्राईवेट’ वीडियो हुआ लीक…

भारतीय टेलीविज़न के सबसे मशहूर और तारीफ़े क़ाबिल शो “तारक मेहता का उलटा चश्मा” और जैसे ही दया भाभी का नाम आता है तो हर दर्शक के दिमाग में हँसी को लेकर एक अलग ही जगह बना चुकी है। पर क्या आप को भी पता है की इस सीरियल में आने से पहले दिशा यानी दया भाभी क्या काम करती थी।

देखए वीडियो

देखिये : 26 जनवरी पर भारत के मुसलमानों को इससे बेस्ट स्पीच कहीं नहीं मिलेगी….

ये स्पीच है मौलाना अबुल कलाम आज़ाद की। जो 1947 में बकरीद के मौके पर दिल्ली की जामा मस्जिद में दी। उन्होंने आज़ादी मिलने पर मुसलमानों को उस वक़्त ख़िताब किया। लेकिन उनकी ये बातें पढ़कर ऐसा लगता है जैसे अभी के लिए कही हैं। इस स्पीच को अमेरिकन स्कॉलर चौधरी मोहम्मद नईम ने उर्दू में तहरीर किया है। आप इसे हिंदी में पढ़िए। और हर मुसलमान को पढ़नी चाहिए। जो हालत आजतक मुसलमानों के बने हुए हैं वो खुद के बनाये हुए हैं। ये स्पीच बताती है कि जब तक हम खुद को नहीं बदलेंगे, कुछ नहीं हो सकता। चाहे कितनी ही सच्चर रिपोर्टें आती रहें। नेता आते रहें। कोई फर्क नहीं पड़ेगा. तो पढ़िए और सोचिए।

मेरे अज़ीज़ो! आप जानते हैं कि वो कौन सी ज़ंजीर है जो मुझे यहां ले आई है। मेरे लिए शाहजहां की इस यादगार मस्जिद में ये इज्तमा नया नहीं। मैंने उस ज़माने में भी किया। अब बहुत सी गर्दिशें बीत चुकी हैं. मैंने जब तुम्हें ख़िताब किया था, उस वक्त तुम्हारे चेहरों पर बेचैनी नहीं इत्मीनान था। तुम्हारे दिलों में शक के बजाए भरोसा था। आज जब तुम्हारे चेहरों की परेशानियां और दिलों की वीरानी देखता हूं तो भूली बिसरी कहानियां याद आ जाती हैं।

तुम्हें याद है? मैंने तुम्हें पुकारा और तुमने मेरी ज़बान काट ली। मैंने क़लम उठाया और तुमने मेरे हाथ कलम कर दिए। मैंने चलना चाहा तो तुमने मेरे पांव काट दिए। मैंने करवट लेनी चाही तो तुमने मेरी कमर तोड़ दी। हद ये कि पिछले सात साल में तल्ख़ सियासत जो तुम्हें दाग़-ए-जुदाई दे गई है। उसके अहद-ए शबाब (यौवनकाल, यानी शुरुआती दौर) में भी मैंने तुम्हें ख़तरे की हर घड़ी पर झिंझोड़ा। लेकिन तुमने मेरी सदा (मदद के लिए पुकार) से न सिर्फ एतराज़ किया बल्कि गफ़लत और इनकारी की सारी सुन्नतें ताज़ा कर दीं। नतीजा मालूम ये हुआ कि आज उन्हीं खतरों ने तुम्हें घेर लिया। जिनका अंदेशा तुम्हें सिरात-ए-मुस्तक़ीम (सही रास्ते ) से दूर ले गया था।

सच पूछो तो अब मैं जमूद (स्थिर) हूं। या फिर दौर-ए-उफ़्तादा (हेल्पलेस) सदा हूं। जिसने वतन में रहकर भी गरीब-उल-वतनी की जिंदगी गुज़ारी है। इसका मतलब ये नहीं कि जो मक़ाम मैंने पहले दिन अपने लिए चुन लिया, वहां मेरे बाल-ओ-पर काट लिए गए या मेरे आशियाने के लिए जगह नहीं रही। बल्कि मैं ये कहना चाहता हूं. मेरे दामन को तुम्हारी करगुज़ारियों से गिला है। मेरा एहसास ज़ख़्मी है और मेरे दिल को सदमा है। सोचो तो सही तुमने कौन सी राह इख़्तियार की? कहां पहुंचे और अब कहां खड़े हो? क्या ये खौफ़ की ज़िंदगी नहीं। और क्या तुम्हारे भरोसे में फर्क नहीं आ गया है। ये खौफ तुमने खुद ही पैदा किया है।

अभी कुछ ज़्यादा वक़्त नहीं बीता, जब मैंने तुम्हें कहा था कि दो क़ौमों का नज़रिया मर्ज़े मौत का दर्जा रखता है। इसको छोड़ दो। जिनपर आपने भरोसा किया, वो भरोसा बहुत तेज़ी से टूट रहा है, लेकिन तुमने सुनी की अनसुनी सब बराबर कर दी। और ये न सोचा कि वक़्त और उसकी रफ़्तार तुम्हारे लिए अपना वजूद नहीं बदल सकते। वक़्त की रफ़्तार थमी नहीं। तुम देख रहे हो! जिन सहारों पर तुम्हार भरोसा था। वो तुम्हें लावारिस समझकर तक़दीर के हवाले कर गए हैं। वो तक़दीर जो तुम्हारी दिमागी मंशा से जुदा है।

अंग्रेज़ों की बिसात तुम्हारी ख्वाहिशों के ख़िलाफ़ उलट दी गई। और रहनुमाई के वो बुत जो तुमने खड़े किए थे। वो भी दगा दे गए। हालांकि तुमने सोचा था ये बिछाई गई बिसात हमेशा के लिए है और उन्हीं बुतों की पूजा में तुम्हारी ज़िंदगी है। मैं तुम्हारे ज़ख्मों को कुरेदना नहीं चाहता और तुम्हारे इज़्तिराब (बेचैनी) में मज़ीद इज़ाफा करना मेरी ख्वाहिश नहीं है। लेकिन अगर कुछ दूर माज़ी (पास्ट) की तरफ पलट जाओ तो तुम्हारे लिए बहुत से गिरहें खुल सकती हैं।

एक वक़्त था कि मैंने हिंदुस्तान की आज़ादी का एहसास दिलाते हुए तुम्हें पुकारा था। और कहा था कि जो होने वाला है उसको कोई कौम अपनी नहुसियत (मातम मनाने वाली स्थिति) से रोक नहीं सकती। हिंदुस्तान की तक़दीर में भी सियासी इंक़लाब लिखा जा चुका है और उसकी गुलामी की जंजीरें 20वीं सदी की हवाएं हुर्रियत से कट कर गिरने वाली हैं। और अगर तुमने वक़्त के पहलू-बा-पहलू क़दम नहीं उठाया तो फ्यूचर का इतिहासकार लिखेगा कि तुम्हारे गिरोह ने, जो सात करोड़ मुसलमानों का गोल था। मुल्क की आज़ादी में वो रास्ता इख्तियार किया जो सफहा हस्ती से ख़त्म हो जाने वाली कौमों का होता है। आज हिंदुस्तान आज़ाद है और तुम अपनी आंखों से देख रहे हो वो सामने लालकिला की दीवार पर आज़ाद हिंदुस्तान का झंडा शान से लहरा रहा है। ये वही झंडा है जिसकी उड़ानों से हाकिमा गुरूर के दिल आज़ाद कहकहे लगाते थे।

ये ठीक है कि वक़्त ने तुम्हारी ख्वाहिशों के मुताबिक अंगड़ाई नहीं ली बल्कि उसने एक कौम के पैदाइशी हक़ के एहतराम में करवट बदली है और यही वो इंकलाब है, जिसकी एक करवट ने तुम्हें बहुत हद तक खौफजदा कर दिया है। तुम ख्याल करते हो तुमसे कोई अच्छी शै (चीज़) छिन गई है और उसकी जगह कोई बुरी शै आ गई है। हां तुम्हारी बेक़रारी इसलिए है कि तुमने अपने आपको अच्छी शै के लिए तैयार नहीं किया था और बुरी शै को अपना समझ रखा था। मेरा मतलब गैरमुल्की गुलामी से है। जिसके हाथों तुमने मुद्दतों खिलौना बनकर जिंदगी बसर की! एक वक़्त था जब तुम किसी जंग के आगाज़ की फिक्र में थे और आज उसी जंग के अंजाम से परेशान हो। आखिर तुम्हारी इस हालत पर क्या कहूं? इधर अभी सफर की जुस्तजू ख़त्म नहीं हुई और उधर गुमराही का ख़तरा भी दर पेश आ गया।

मेरे भाई मैंने हमेशा सियासत की ज्यादतियों से अलग रखने की कोशिश की है। कभी इस तरफ कदम भी नहीं उठाया। क्योंकि मेरी बातें पसंद नहीं आती लेकिन आज मुझे जो कहना है उसे बेरोक होकर कहना चाहता हूं। हिंदुस्तान का बंटवारा बुनियादी तौर पर गलत था। मज़हबी इख्तिलाफ़ को जिस तरह से हवा दी गई उसका नतीजा और आसार ये ही थे जो हमने अपनी आंखों से देखे। और बदकिस्मती से कई जगह पर आज भी देख रहे हैं।

पिछले सात बरस के हालात दोहराने से कोई फायदा नहीं और न उससे कोई अच्छा नतीजा निकलने वाला है। अलबत्ता मुसलमानों पर जो मुसीबतों का रैला आया है वो यक़ीनन मुस्लिम लीग की ग़लत क़यादत का नतीजा है। ये सब कुछ मुस्लिम लीग के लिए हैरत की बात हो सकती है। मेरे लिए इसमें कुछ नई बात नहीं है। मैं पहले से ही इस नतीजे का अंदाजा था।

अब हिंदुस्तान की सियासत का रुख बदल चुका है। मुस्लिम लीग के लिए यहां कोई जगह नहीं है। अब ये हमारे दिमागों पर है कि हम अच्छे अंदाज़-ए-फ़िक्र में सोच भी सकते हैं या नहीं। इसी ख्याल से मैंने नवंबर के दूसरे हफ्ते में हिंदुस्तान के मुसलमान रहनुमाओं को देहली में बुलाने का न्योता दिया है। मैं तुमको यकीन दिलाता हूं. हमको हमारे सिवा कोई फायदा नहीं पहुंचा सकता।

मैंने तुम्हें हमेशा कहा और आज फिर कहता हूं कि नफरत का रास्ता छोड़ दो। शक से हाथ उठा लो और बदअमली को तर्क (त्याग) दो। ये तीन धार का अनोखा खंजर लोहे की उस दोधारी तलवार से तेज़ है, जिसके घाव की कहानियां मैंने तुम्हारे नौजवानों की ज़बानी सुनी हैं। ये फरार की जिंदगी, जो तुमने हिजरत (पलायन) के नाम पर इख़्तियार की है। उसपर गौर करो तुम्हें महसूस होगा कि ये ग़लत है।

अपने दिलों को मज़बूत बनाओ और अपने दिमागों को सोचने की आदत डालो और फिर देखो ये तुम्हारे फैसले कितने फायदेमंद हैं। आखिर कहां जा रहे हो? और क्यों जा रहे हो? ये देखो मस्जिद की मीनारें तुमसे उचक कर सवाल कर रही हैं कि तुमने अपनी तारीख के सफ़हात को कहां गुम कर दिया है? अभी कल की बात है कि यही जमुना के किनारे तुम्हारे काफ़िलों ने वज़ू (नमाज़ से पहले मुंह हाथ धोने का प्रोसेस) किया था और आज तुम हो कि तुम्हें यहां रहते हुए खौफ़ महसूस होता है। हालांकि देल्ही तुम्हारे खून की सींची हुई है।

अज़ीज़ों! अपने अंदर एक बुनियादी तब्दीली पैदा करो जिस तरह आज से कुछ अरसे पहले तुम्हारे जोश-ओ-ख़रोश बेजा थे। उसी तरह से आज ये तुम्हारा खौफ़ बेजा है। मुसलमान और बुज़दिली या मुसलमान और इश्तआल (भड़काने की प्रक्रिया) एक जगह जमा नहीं हो सकते। सच्चे मुसलमान को कोई ताक़त हिला नहीं सकती है और न कोई खौफ़ डरा सकता है। चंद इंसानी चेहरों के गायब हो जाने से डरो नहीं। उन्होंने तुम्हें जाने के लिए ही इकट्ठा किया था आज उन्होंने तुम्हारे हाथ में से अपना हाथ खींच लिया है तो ये ताज्जुब की बात नहीं है। ये देखो तुम्हारे दिल तो उनके साथ रुखसत नहीं हो गए। अगर अभी तक दिल तुम्हारे पास हैं तो उनको अपने उस ख़ुदा की जलवागाह बनाओ।

मैं क़लाम में तकरार का आदी नहीं हूं लेकिन मुझे तुम्हारे लिए बार-बार कहना पड़ रहा है। तीसरी ताक़त अपने घमंड की गठरी उठाकर रुखसत हो चुकी है। और अब नया दौर ढल रहा है अगर अब भी तुम्हारे दिलों का मामला बदला नहीं और दिमागों की चुभन ख़त्म नहीं हुई तो फिर हालत दूसरी होगी। लेकिन अगर वाकई तुम्हारे अंदर सच्ची तब्दीली की ख्वाहिश पैदा हो गई है तो फिर इस तरह बदलो, जिस तरह तारीख (इतिहास) ने अपने को बदल लिया है। आज भी हम एक दौरे इंकलाब को पूरा कर चुके, हमारे मुल्क की तारीख़ में कुछ सफ़हे (पन्ने) ख़ाली हैं और हम उन सफ़हो में तारीफ़ के उनवान (हेडिंग) बन सकते हैं मगर शर्त ये है कि हम इसके लिए तैयार भी हो।

अज़ीज़ों, तब्दीलियों के साथ चलो! ये न कहो इसके लिए तैयार नहीं थे, बल्कि तैयार हो जाओ। सितारे टूट गए, लेकिन सूरज तो चमक रहा है। उससे किरण मांग लो और उस अंधेरी राहों में बिछा दो। जहां उजाले की सख्त ज़रुरत है।

मैं तुम्हें ये नहीं कहता कि तुम हाकिमाना इक्तेदार के मदरसे से वफ़ादारी का सर्टिफिकेट हासिल करो। मैं कहता हूं कि जो उजले नक्श-ओ-निगार तुम्हें इस हिंदुस्तान में माज़ी की यादगार के तौर पर नज़र आ रहे हैं, वो तुम्हारा ही काफ़िला लाया था. उन्हें भुलाओ नहीं। उन्हें छोड़ो नहीं उनके वारिस बनकर रहो और समझ लो तुम भागने के लिए तैयार नहीं तो फिर कोई ताक़त तुम्हें नहीं भगा सकती। आओ अहद (क़सम) करो कि ये मुल्क हमारा है। हम इसी के लिए हैं और उसकी तक़दीर के बुनियादी फैसले हमारी आवाज़ के बगैर अधूरे ही रहेंगे।

आज ज़लज़लों से डरते हो? कभी तुम ख़ुद एक ज़लज़ला थे। आज अंधेरे से कांपते हो! क्या याद नहीं रहा कि तुम्हारा वजूद ख़ुद एक उजाला था। ये बादलों के पानी की सील क्या है कि तुमने भीग जाने के डर से अपने पायंचे चढ़ा लिए हैं।’ वो तुम्हारे ही इस्लाफ़ थे जो समुंदरों में उतर गए। पहाड़ियों की छातियों को रौंद डाला। आंधियां आईं तो उनसे कह दिया कि तुम्हारा रास्ता ये नहीं है। ये ईमान से भटकने की ही बात है जो शहंशाहों के गिरेबानों से खेलने वाले आज खुद अपने ही गिरेबान के तार बेच रहे हैं। और ख़ुदा से उस दर्जे तक गाफ़िल हो गये हैं कि जैसे उसपर कभी ईमान ही नहीं था।

अज़ीज़ों मेरे पास कोई नया नुस्ख़ा नहीं है वही चौहदा सौ बरस पहले का नुस्ख़ा है. वो नुस्ख़ा जिसको क़ायनात का सबसे बड़ा मोहसिन (मोहम्मद साहब) लाया था। और वो नुस्ख़ा है क़ुरान का ये ऐलान, ‘बददिल न होना, और न गम करना, अगर तुम मोमिन (नेक, ईमानदार) हो, तो तुम ही ग़ालिब होगे।’

आज की सोहबत खत्म हुई। मुझे जो कुछ कहना था वो कह चुका, लेकिन फिर कहता हूं, और बार-बार कहता हूं अपने हवास पर क़ाबू रखो। अपने गिर्द-ओ-पेश अपनी जिंदगी के रास्ते खुद बनाओ। ये कोई मंडी की चीज़ नहीं कि तुम्हें ख़रीदकर ला दूं। ये तो दिल की दुकान ही में से अमाल (कर्म) की नक़दी से दस्तयाब (हासिल) हो सकती हैं।

वस्सलाम अलेक़ुम!

कश्मीर में हिमस्खलन से सेना के 11 जवान शहीद, कई लापता!

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जब पूरा देश गणतंत्र दिवस के जश्न में डूबा था तब सीमा पर हमारे देश के कुछ जवान शहीद हो गये. कश्मीर के गुरेज सेक्टर में सीमा की रक्षा करते 10 जवान शहीद हो गये. घाटी के गुरेज सेक्टर में दो जगहों पर हिमस्खलन में सेना के 10 जवानों की मौत हो गई. जबकि कई अन्य लापता हैं.

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चट्टान गिरने से से यह घटना हुई :

सेना के एक अधिकारी के मुताबिक बुधवार की शाम सेना के शिविर पर बर्फ की एक चट्टान गिरने से से यह घटना हुई, उस चट्टान के नीचे बड़ी संख्या में जवान फंस गये थे. तुरंत बचाव कार्य शुरू किया गया और एक जूनियर कमीशनप्राप्त अधिकारी समेत 10 सैनिकों को बचा लिया गया.

बुधवार की शाम को ही हिमस्खलन हुआ :

सेना के एक अधिकारी के मुताबिक गुरुवार की सुबह 3 जवानों का शव निकाला गया, जबकि बुधवार की शाम को ही हिमस्खलन हुआ था और उसमें शिविर के कई जवान फंस गये थे. सेना का एक गस्ती भी हिमस्खलन की चपेट में आ गया था, जो कि अपनी चौकी पर जा रहा था.

अधिकारियों के मुताबिक लापता सैनिकों की संख्या का सही अनुमान अभी नहीं लगाया जा सका है. इसकी वजह भी हिमपात है वहां हिमपात अभी भी जारी है जिसके चलते बचाव अभियान में बार बार दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है.

वहीँ दूसरी तरफ बुधवार को ही गंदरबल जिले के सोनमर्ग में हिमस्खलन हुआ जिसकी चपेट में आने से एक अधिकारी शहीद हो गया.

जबकि गुरेज सेक्टर में हिमपात की चपेट में आने से एक परिवार के चार सदस्यों की भी मौत हो गई, प्रशासन ने ये सब देखते हुये कश्मीर घाटी में बर्फ क्षेत्रों में ऊंचाई पर हिमस्खलन की चेतावनी जारी की है.

फ़िलहाल जम्मू कश्मीर के इन क्षेत्रों में बीते तीन दिनों से रुक रुक कर हिमपात हो रहा है, जिसके चलते ऐसी स्थितियों का सामना करना पड़ रहा है.

पेट्रोल मिलेगा 28 रुपये लीटर…मगर जोखिम भरा है 2000 का नोट बचाकर रखना !

 

rrrr1अर्थ क्रांति के संचालकों की बात सच मानी जाये तो मोदी सरकार कुछ दिनों बाद सभी बड़े नोटों को बंद कर देगी। इन परिस्थितियों में 2000 के नोट बचाकर रखना लोगों के लिए नुकसान दायक होसकता है। अर्थक्रांति का दावा है कि वो 2013 से नरेंद्र मोदी के संपर्क में हैं। इस जुलाई में पहली बार प्रधानमंत्री बनने के बाद मोदी से उन लोगों की महज 9 मिनट की मुलाकात हुई थी। उसके बाद एक दिन अचानक पीएमओ से उन्हें बुलाया और 15 मिनट में सब कुछ बता देने के लिए समय मिला था, लेकिन मोदी ने उनसे 90 मिनट तक बात की।

अर्थ क्रांति का यह भी दावा है कि उनसे बातचीत के बाद ही मोदी ने 500 और 1000 के नोट बंद करने का फैसला किया। अर्थ क्रांति के मुताबिक उन्होंने सरकरा को सारे टैक्स हटाकर सिर्फ एक तरह का टैक्स लगाने का सुझाव दिया है। मोदी सरकार इस दिशा में आगे बढ़ती हुई दिखाई दे रही है। अगले साल एक अप्रैल से जीएसटी लागू करने को इसी दिशा में उठाया गया कदम माना जा रहा है। अर्थक्रांति का दावा है कि अगर सारे टैक्स खत्म करके एक टैक्स का फार्मूला लागू हो गया तो देश में पेट्रोल 28 रुपये और डीजल इससे भी कम कीमत पर मिलना शुरु हो जायेगा।

क्रांति के संचालकों की बात सच मानी जाये तो मोदी सरकार कुछ दिनों बाद सभी बड़े नोटों को बंद कर देगी। इन परिस्थितियों में 2000 के नोट बचाकर रखना लोगों के लिए नुकसान दायक होसकता है। अर्थक्रांति का दावा है कि वो 2013 से नरेंद्र मोदी के संपर्क में हैं। इस जुलाई में पहली बार प्रधानमंत्री बनने के बाद मोदी से उन लोगों की महज 9 मिनट की मुलाकात हुई थी। उसके बाद एक दिन अचानक पीएमओ से उन्हें बुलाया और 15 मिनट में सब कुछ बता देने के लिए समय मिला था, लेकिन मोदी ने उनसे 90 मिनट तक बात की।

अर्थ क्रांति का यह भी दावा है कि उनसे बातचीत के बाद ही मोदी ने 500 और 1000 के नोट बंद करने का फैसला किया। अर्थ क्रांति के मुताबिक उन्होंने सरकरा को सारे टैक्स हटाकर सिर्फ एक तरह का टैक्स लगाने का सुझाव दिया है। मोदी सरकार इस दिशा में आगे बढ़ती हुई दिखाई दे रही है। अगले साल एक अप्रैल से जीएसटी लागू करने को इसी दिशा में उठाया गया कदम माना जा रहा है। अर्थक्रांति का दावा है कि अगर सारे टैक्स खत्म करके एक टैक्स का फार्मूला लागू हो गया तो देश में पेट्रोल 28 रुपये और डीजल इससे भी कम कीमत पर मिलना शुरु हो जायेगा।

गणतंत्र दिवस के मौके पर – टाटा ने बनाई दुनिया की सबसे घातक तोप , खासियत पढ़कर होश उड़ जाएंगे

vvvvvvvvvदिल्ली- भारत के सबसे प्रतिष्ठित समूह टाटा ने दुनिया की सबसे बेहतरीन तोप बनाकर एक इतिहास रच दिया है | इस तोप के आने के बाद पूरी दुनिया के हथियार बाजार में खलबली मच गयी है | टाटा की यह तोप दुनिया की सबसे बेहतरीन मानी जाने वाली बोफोर्स से लगभग दो गुनी दूरी तक मार करने में सक्षम है |

तोप ने मचा दी खलबली –
टाटा समूह ने समूह ने देश में ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के हथियार बाजार में 155 एमएम की 52 कैलीबर वाली तोप उतार कर खलबली मचा दी है | बोफोर्स तोपों से अधिक क्षमता रखने वाली यह तोप देश के निजी क्षेत्र की ओर से रक्षा बाजार में एक मजबूत दावेदारी के रूप में सामने आई है |