लड़की को ये करवाने से पहले सोचना चाहिए था कि ऐसा करने से दर्द तो होगा ही….

आज हमारे देश में यूथ का बहुत बड़ा रोल है, क्योंकी उन्ही से हमारे देश का भविष्य जुड़ा हुआ है..आज का यूथ न जाने किन किन चीज़ों में अपनी रूचि  दिखाने लगा है, किसी को राजनीति में रूचि है, तो किसी को फैशन के क्षेत्र में जाना है..आपको बता दें कि आज का यूथ कितना फैशनेबल  हो चुका है, किसी को अपने बालों को रंगने का शौक है, किसी को बॉडी पीयर्सिंग का, तो किसी को बॉडी टैटू बनवाने का शौक है..tattoo-2

आज हम आपको एक ऐसा वीडियो दिखाने  जा रहे हैं जिसमें एक लड़की अपने हाथों पर टैटू बनवा रही है..जिसे बनवाते समय दर्द की वजह से लड़की का रोना छूट गया है..जिसके बाद लड़की रो रो कर बेहाल है|

देखें वीडियो 

हरियाणवी छोरी और 12 साल के लड़के का डांस हुआ वायरल: देखें वीडियो

unnamed

एक ऐसा ही वीडियो हम आपको दिखानें वाले हैं जो कि सोशल मीडिया साइट यू-ट्यूब पर एक हरियाणवी लड़की के डांस का वीडियो वायरल हो रहा है। इस वीडियो को जो देख रहा है वह बस देखता ही रह आ रहा है। फिलहाल यह वीडियो किसने और कहां से अपलोड किया है उस बात की जानकारी तो सामने नही आई है लेकिन यह वीडियो किसी पब्लिक फंक्शन के दौरान डांस प्रोग्राम का दिख रहा है। इसे सोशल मीडिया पर बड़ी तेजी से लोग शेयर कर रहें हैं।

आप भी जरा देखिये इस गजब के डांस को।

अरबी टुकड़ों पर पलने वाले बॉलीवुड ने हिन्दुओं की माँ-बहनों के बलिदान मज़ाक बना दिया : केशर देवी

 

ब्लॉग: केशर देवी (यूनाइटेड हिन्दी) :- स्कूल की बात है, स्कूल में जब कोई टीचर नहीं आते थे तो उनकी जगह टेम्परेरी टीचर कुछ दिन के लिए पढ़ाने आते थे। तब मैं सातवीं क्लास में थी और हमारी हिन्दी की मैम एक दो महीने के लिए बाहर गयीं थीं। उनकी जगह एक नीरज सर पढ़ाने आने लगे, टेम्परेरी टीचर्स अक्सर मस्त होते हैं, मज़े में पढ़ाते हैं। हम थे भी तब छोटे तो वो हमको कहानियाँ सुनाया करते थे, हम रोज उनके पीछे पड़ जाते सर कहानी, सर कहानी, अब उनको कोर्स भी कवर करना होता था तो हफ्ते में 2-3 कहानी तो सुनाते ही देते थे। जब वो कहानी सुनाते तो सारी क्लास चुपचाप सुनती, SUPW के पीरिएड भी वो ही ले लेते और हम कहानी सुनते रहते।

ज्यादातर वो इतिहास की बातें बताते, एक बार उन्होंने स्वामी विवेकानन्द की कहानी सुनाई, कैसे उन्होंने शून्य पर भाषण दिया, एक बार भानगढ़ के भूतों की और एक बार राजा हम्मीर की, एक बार भगत सिंह की और एक बार अक़बर के नवरत्नों की।

पर जिस कहानी ने हमें पूरी तरह झकझोर डाला था और कई साल तक क्लास के सब बच्चे उस कहानी की वजह से उनको याद करते रहे वो कहानी थी रानी पद्मिनी के जौहर की। क्लास में वीररस की वर्षा हो रही थी, शायद ही कोई ऐसा बच्चा था जिसके रोंगटे खड़े न हों। चित्तौड़ के किले की विश्वसुन्दरी रानी के सौंदर्य, उसके पति के अद्भुत पराक्रम, क्षत्रियों की विस्मयकारी रणनीति, आततायी ख़िलजी की नीचता और किले की हज़ारों वीरांगनाओं के भीषण जौहर की वह कहानी मेरे दिल में आज तक ज्यों की त्यों बनी हुई है। चित्तौड़ के किले की मिट्टी आज भी काली है, चित्तौड़ के किले से रात आठ बजे बाद आज भी मर्माहत चीखें सुनाई पड़ती हैं, यह सुनकर हम बच्चे अनुमान लगा पाते थे कि जिन्दा जलने का दर्द क्या होता है? पर बौद्धिक पशु यह नहीं समझ सकते कि क्यों उस फूल सी कोमल रानी ने अपनी सुंदरता समेत स्वयं को दावानल में झुलसा डाला था? क्यों किले की हज़ारों औरतें, बच्चे, बूढ़े आग के दरिया में हंसकर कूद पड़े? रतन सिंह, गोरा और बादल जैसे हज़ारों क्षत्रिय वीरों ने अपने प्राण युद्ध में बलिदान कर दिए?

मैं बचपन में सुनी उस कहानी को आज इसलिए लिख रही हूँ ताकि वेटिकन-अरब के टुकड़ों पर पलने वाले बॉलीवुड के जानवरों ने हिन्दुओं की माँ बहनों के साहस और बलिदान का भद्दा मज़ाक बना डाला है।

आगे के पृष्ठ पर पूरा ब्लॉग पढ़िये 

इस तरह आप के अंदर पलंगतोड़ ताकत आ जाएगी…

images

सेक्स एक बेहद सुखद अनुभव हैं। हर स्त्री या पुरुष को एक उम्र के बाद संबंध बनाने की इच्छा होती है और ये बहुत ही स्वाभाविक भी है। सेक्स में अपने पार्टनर को संतुष्ट करना बहुत ज़रूरी है मगर कई ऐसे पुरुष है जो अपनी पार्टनर को उन पलों के दौरान पूरी तरह से संतुष्ट नहीं कर पाते है। वह ज़्यादा समय तक सेक्स करना चाहते है मगर ऐसा कर नहीं पाते। ये बात उन्हें हर वक्त सताती है और इसकी वजह से उन पुरुषों का दुसरे काम में मन भी नहीं लगता।

आज हम आपको कुछ ऐसी बाते बताते हैं जिससे आप लंबे समय तक संबंध बना सकेंगे।

पोजीशन बदले: लंबे समय तक सेक्स करने में पोजीशन काफी अहम् रोल निभाती है। सेक्स के दौरान अलग अलग पोजीशन का उपयोग करें। इससे सेक्स के दौरान रोमांच और वक्त दोनों बढ़ता है।

फ़ॉरप्ले पर अधिक ध्यान दे: सेक्स में फोरप्ले की एक अहम् भूमिका होती है। इससे स्त्री और पुरुष दोनों भी उत्साहित होते है। सेक्स से ज़्यादा फोरप्ले को महत्त्व देना चाहिए इससे आपका सेक्स का समय भी बढ़ता है और आपकी पार्टनर जल्द संतुष्ट भी होती है।

व्यायाम करें: सेक्स के दौरान फिटनेस बेहद अहम् भूमिका निभाती है। बेड में बेहतर परफॉर्म करने के लिए तंदुरुस्त होना बहुत ज़रूरी है। अगर आप फिट होंगे तभी आप लंबे समय तक सेक्स कर सकोगे और अपनी पार्टनर को खुश भी रखोगे। इसके अलावा सिगरेट या शराब का सेवन करना पूरी तरह से बंद कर दे।

गैजेट्स दूर रखे: अपने सेक्स समय को बढ़ाने के लिए हर उस चीज़ को अपने से दूर रखे जो इसमें खलल डाल सकती है। फोन, लैपटॉप और अन्य गैजेट्स को अपने से दूर ही रखे। जिस जगह आप सम्बन्ध बना रहे हो वहाँ केवल आप दोनों ही होने चाहिए।

जब वियतनाम ने कहा- अगर शिवाजी हमारे देश में पैदा होते तो हम विश्व पर राज करते

अगर शिवाजी हमारे देश में पैदा होते तो हम विश्व पर राज करते

छत्रपती शिवाजी महाराज सिर्फ महान योद्धा ही नहीं थे, वे महान ईश्वर भक्त एवं देशप्रेमी भी थे। उनके उच्च चरित्र की आज भी मिसाल दी जाती है। ऐसे महापुरुषों का यश सदैव अमर रहता है। भारत भूमि ही नहीं, विदेशों में भी छत्रपती शिवाजी महाराज के प्रशंसक व समर्थक हैं, लोग वहां उन्हें आदर्श मानते हैं। प्रसिद्ध आध्यात्मिक पत्रिका कल्याण में उनकी गाथा से संबंधित एक सत्यकथा प्रकाशित हो चुकी है।

एक छोटे-से देश वियतनाम ने जब अमरीका जैसे शक्तिशाली राष्ट्र को शिकस्त दी तो यह विश्व के इतिहास में अनोखी घटना थी। विजय के पश्चात इस युद्ध के नायक हो ची मिन्ह से पत्रकारों ने प्रश्न पूछा – आप अमरीका जैसे देश को कैसे पराजित कर सके?

इस पर मिन्ह ने जवाब दिया, अमरीका जैसी महाशक्ति को पराजित करना असंभव है, परंतु उस महाशक्ति को टक्कर देने के लिए हमने एक महान राजा के चरित्र का अध्ययन किया। उसी से हमें प्रेरणा मिली। हमने युद्ध करने की नीति बनाई और आज विजयश्री ने हमारा वरण किया है।

पत्रकारों ने पूछा, कौन हैं वे राजा?

मिन्ह ने जवाब दिया, हिंदुस्तान के छत्रपति शिवाजी महाराज, अगर वे हमारे देश में पैदा हुये होते तो आज हम पूरे विश्व पर शासन कर रहे होते।

इस घटना के कई वर्षों बाद वियतनाम की विदेश मंत्री भारत की राजधानी दिल्ली आईं और उन्होंने यहां के कई ऐतिहासिक स्थलों व महापुरुषों की समाधि देखी। उन्होंने पूछा, छत्रपती शिवाजी महाराज की समाधि कहां है ?

अधिकारियों ने जवाब दिया, रायगढ़।

वियतनाम की विदेश मंत्री रायगढ़ पहुंचीं और उन्होंने छत्रपती शिवाजी की समाधि के दर्शन किए। साथ ही वहां की मिट्टी उठाई और अपने साथ वियतनाम ले गईं।

पत्रकारों ने जब उनसे इसका कारण पूछा तो उन्होंने जवाब दिया, यह वीरों की भूमि है। इसी मिट्टी में छत्रपती शिवाजी व महारणा प्रताप जैसे उच्च कोटि के धर्मात्मा एवं शूरवीरों का जन्म हुआ है। इसलिए भारत की यह मिट्टी मैं वियतनाम की मिट्टी में मिलाऊंगी, ताकि हमारे यहां भी शिवाजी व महाराणा जैसे शूरवीर पैदा हों।

 

अनुराग कश्यप को राजपूत होने पर है शर्म, भंसाली को पीटने वाले को कहा हिंदू उग्रवादी

अब हिन्दू उग्रवादी टि्वटर की दुनिया से निकलकर असली दुनिया में आ गए हैं

जयपुर में ‘पद्मावती’ फिल्म की शूटिंग के दौरान शुक्रवार को राजपूत करणी सेना के कार्यकर्ताओं की ओर से इस मूवी के डायरेक्टर संजय लीला भंसाली के साथ हुई मारपीट मामले में बॉलीवुड उनके समर्थन में उतर आया है।

करण जौहर ने इस मामले पर कई ट्वीट किए और कहा कि संजय लीला भंसाली के साथ जो हुआ उससे भयभीत हूं। समय आ गया है जब हम सभी इंडस्ट्री के रूप में एकजुट होकर अपने लोगों के साथ खड़े हों। फिल्म की शूटिंग और रिलीज के दौरान कई तरह की परेशानियों से गुजरने पड़ता है। मैं संजय की भावनाएं समझ सकता हूं। मैं उनके साथ खड़ा हूं।

अनुराग कश्यप ने भी तीन ट्वीट किए और लिखा कि क्या एक बार फिल्म इंडस्ट्री साथ आकर खड़ी हो सकती है और टट्टू बनने से मना कर सकती है जिस पर सभी बेबकूफ सवारी करते हैं।

दूसरे ट्वीट में लिखा कि करणी सेना तुम पर शर्म आती है, तुम्हारे चलते मुझे राजपूत होने पर शर्म आती है और उन्होंने आगे लिखते हुए कहा कि तुम बिना हड्डी के डरपोक हो। अब हिन्दू उग्रवादी टि्वटर की दुनिया से निकलकर असली दुनिया में आ गए हैं।

अभिनेत्री प्रियंका चोपड़ा ने लिखा कि ‘पद्मावती’ के सेट हुई घटना हास्यास्पद है। रचनात्मक स्वतंत्रता और सिनेमा लाइसेंस जैसी भी कोई चीज होती है। कलाकार या कोई भी गुंडों की दया पर निर्भर नहीं हो सकता। प्रियंका के इस ट्वीट को आलिया भट्ट ने रीट्वीट किया है।

आपको बता दें कि कि जयगढ़ में शूटिंग के दौरान करणी सेना के कार्यकर्ताओं की ओर से शूटिंग यूनिट के सदस्यों और डायरेक्टर भंसाली के साथ गालीगलोच करते हुए मारपीट की। मारपीट और हंगाम के फोटो और वीडियो भी सोशल मीडिया पर अब वायरल हो गए हैं।

इस घटना के बाद पूरे इलाके में पुलिस बल तैनात कर दिया गया है और फिल्म का विरोध जता रहे करणी सेना के लोगों को हिरासत में लिया गया है।

गौरतलब है कि ‘पद्मावती’ राजस्थानी पृष्ठभूमि की कहानी है. फिल्म में शाहिद कपूर ‘पद्मावती’ के पति और राजपूत शासक राजा रतन सिंह की भूमिका में हैं। इस फिल्म में रनवीर सिंह सल्तनत काल में दिल्ली के शासक अलाउद्दीन खिलजी की भूमिका निभा रहे हैं, जिसे रानी पद्मावती से प्रेम हो गया था। फिल्म में पद्मावती की भूमिका में दीपिका पादुकोण हैं।

10 लड़कियों ने सुनसान जगह पर ले जाकर किया लड़के का गैंगरेप

नई दिल्ल:आप लड़कियों और महिलाओं के साथ बलात्कार या गैंगरेप की घटनाएं सुनते होंगे लेकिन आज हम आपको एक ऐसी खबर बताने जा रहे है जिसमे एक लड़का गैंगरेप का शिकार हुआ।

– लड़का अपने घर से मॉर्निंग वॉक पर निकला था। वह जब अपने घर से कुछ ही दूर निकला तो अकेला देख उसे लड़कियों ने अगवा कर लिया।

– लड़के को अगवा कर एक सुनसान जगह पर ले जाया गया जहां पर एक नहीं बल्कि 10 लड़कियों ने उसे साथ बारी बारी से बलात्कार किया। वह चिल्ला न सके और विरोध न कर सके इसलिए उसकी गर्दन पर चाकू रख दिया।

– लड़कियों के झुंड के बीच अकेला लड़का कुछ न कर सका और हवस का शिकार होते रहा। इतना ही नहीं लड़का किसी के सामने इस शर्मनाक हरकत के बारे में मुंह न खोले इसलिए उसे जान से मारने की धमकी भी दी।

– जानकारी के मुताबिक यह शर्मनाक मामला ऑस्ट्रेलिया के सिडनी का है। बताया जा रहा है जिन लड़कियों ने उसके साथ गैंगरेप किया उन सभी ने शराब पी रखी थी।

– पीड़ित लड़के ने इस मामले की शिकायत पुलिस में


दर्ज कराई जिसे सुनकर सभी हैरान हो गए।

ब्लॉग : दिल्ली का मौहम्मद तुगलक और अरविन्द केजरीवाल

क्योंकि सपने देखना हर व्यक्ति नैसर्गिक अधिकार है।

ब्लॉग : राकेश कुमार आर्य (‘उगता भारत’ साप्ताहिक अखबार के संपादक; बी.ए.एल.एल.बी. तक की शिक्षा, पेशे से अधिवक्ता राकेश जी कई वर्षों से देश के विभिन्न पत्र पत्रिकाओं में स्वतंत्र लेखन कर रहे हैं। अब तक बीस से अधिक पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं। वर्तमान में ‘मानवाधिकार दर्पण’ पत्रिका के कार्यकारी संपादक व ‘अखिल हिन्दू सभा वार्ता’ के सह संपादक हैं। सामाजिक रूप से सक्रिय राकेश जी अखिल भारत हिन्दू महासभा के राष्ट्रीय प्रवक्ता व राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और अखिल भारतीय मानवाधिकार निगरानी समिति के राष्ट्रीय सलाहकार भी हैं। दादरी, ऊ.प्र. के निवासी हैं।)

दिल्ली को ‘स्वर्ग’  बनाने के पश्चात दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल अब पंजाब का मुख्यमंत्री बनने के सपने देखने लगे हैं। हम उनके इन सपनों को मुंगेरीलाल के हसीन सपने नहीं कहेंगे, क्योंकि सपने देखना हर व्यक्ति नैसर्गिक अधिकार है, और लोकतंत्र व्यक्ति के सपनों का न केवल सम्मान करता है, अपितु उन्हें साकार कराने के लिए उचित अवसर भी प्रदान करता है। ये सपने व्यक्ति की निजी महत्वाकांक्षाएं भी हो सकती हैं, पर लोकतंत्र किसी की निजी महत्वाकांक्षाओं का भी अपमान न करके उनका भी सम्मान ही करता है।

लोकतंत्र में जो व्यक्ति सपने देखता है, या अपनी महत्वाकांक्षाएं पालता है-उनका संबंध लोकहित से होता है और लोकतंत्र लोकहित का संरक्षक है। इसलिए सपने देखने वाले या निजी महत्वाकांक्षाएं पालने वाले हर व्यक्ति से लोकतंत्र यह अपेक्षा करता है कि उसके सपने और निजी महत्वाकांक्षाएं लोकहित के अनुकूल होने चाहिएं। यदि उसके सपनों और निजी महत्वाकांक्षाओं में लोकहित की उपेक्षा है या अवहेलना का अंश है तो लोकतंत्र ऐसे व्यक्ति के सपनों और महत्वाकांक्षाओं को अलोकतांत्रिक बताकर इतिहास की अदालत को सौंप देता है, और फिर अपने सपनों और महत्वाकांक्षाओं की नौटंकी से जनहित का मखौल उड़ाने वालों को इतिहास न केवल लताड़ता है, अपितु कठोर दण्ड भी देता है। जिन लोगों ने अब से पूर्व अपनी नौटंकियों के पालने में झूलते-झूलते सपने देखे हैं-या अंगूठा चूसते-चूसते निजी महत्वाकांक्षाएं पाली हैं-उन्हें इतिहास ने आज कूड़ेदान में फेंक दिया है, या उनकी नौटंकियों का रहस्य बता-बताकर लोगों को उनके राजनीतिक भ्रष्टाचार का काला चेहरा दिखा-दिखाकर उन्हें सार्वजनिक रूप से कोड़े मारने की सजा दी है।

दिल्ली के मुख्यमंत्री केजरीवाल पंजाब तो जाएं और वहां के मुख्यमंत्री भी बनें पर अपनी ‘कथनी-करनी’ के मकडज़ाल पर अपने आप ही दृष्टिपात कर लें, वह दिल्ली को वैसा नहीं बना पाये हैं-जैसा उन्होंने दिल्ली के मतदाताओं से चुनाव के समय वचन दिया था। इसके विपरीत दिल्ली के लोग अपनी पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित को याद करने लगे हैं कि राज तो उन्हीं का ठीक था। यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है कि दिल्ली को भ्रष्टाचार मुक्त प्रदेश बनाने का संकल्प व्यक्त करने वाले अरविंद केजरीवाल की दिल्ली भ्रष्टाचार में आकण्ठ डूबी है, इतना ही नही उनके विधायकों पर चरित्र हनन के गंभीर आरोप लगे हैं और कईयों को ऐसे निकृष्ट मामलों में जेल की हवा भी खानी पड़ी है। देश की राजधानी में बैठे विधायकों को राजशाही ठाट उपलब्ध कराने के लिए उनके वेतन में भी अप्रत्याशित वृद्घि की गयी, जबकि एक आम आदमी आज तक अपनी समस्याओं के लिए रो रहा है। यही कारण है कि आज हर वह मतदाता अपने आपको ठगा सा अनुभव कर रहा है-जो कि पूर्व में अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी को मत दे चुका है। इधर केजरीवाल हैं जो कि दिल्ली की हर समस्या के लिए मोदी और भाजपा को दोषी मानते हैं। उन्हें उलाहना देना आता है, पर किसी समस्या का समाधान खोजना संभवत: नहीं आता। क्या ही अच्छा होता कि वे समस्याओं का समाधान करते जाते और करते जाते तो उन समाधानों में अड़ंगे डालने वाले स्वयं ही जनता के सामने नंगे होते जाते। पर वह तो पहले दिन से ही रोने लगे कि-‘ये देखो भाजपा आ ली और ये देखो शीला आ लीं, ये मुझे काम नही करने दे रहे।’ उन्होंने अपनी स्थिति वैसा बना ली जैसा एक स्कूल जाने वाला वह कामचोर बच्चा बना लेता है जो पहले ही सोच कर चलता है कि जब मास्टरजी पूछेंगे कि काम करके क्यों नहीं आया? तो कह दूंगा कि-‘दीदी ने लाइट बंद कर दी थी, या आज हमारी गली का ट्रांसफार्मर फुंक गया था, या आज मम्मी मुझे मार्केट ले गयी और मैं काम नही कर पाया।’ सचमुच लाइट बंद करने या ट्रांसफार्मर फुंक जाने या मम्मी के साथ मार्केट चले जाने के बहाने अब जनता सुनने वाली नही है, जैसे मास्टरजी इन बहानों से तंग आकर बेंत हाथ में लेकर बच्चे की नौटंकी का उचित पुरस्कार उसे दे ही देते हैं वैसे ही यह जनता भी जिस दिन ‘मास्टरजी’ बनती है ना केजरीवाल जी! उस दिन हर नौटंकी का हिसाब कर देने का साहस रखती है। भारत के लोकतंत्र में इस जनता ने अच्छे-अच्छे तानाशाहों या नौटंकीबाजों की वास्तविकता पहचानकर जब उन्हें सजा दी तो कोई उन्हें पानी देने वाला भी नहीं रहा।

पंजाब की जनता अपने लिए किसे चुनेगी यह तो समय ही बताएगा-पर हम यहां की जनता के निर्णय की परिपक्वता पर आज ही संतुष्ट हैं कि वह जो भी निर्णय लेगी उसे सोच समझकर ही लेगी। केजरीवाल यह भूल जाएं कि जनता कुछ भी नहीं जानती, इसके विपरीत यह मान लें कि यह जनता सब कुछ जानती है। दिल्ली पर शासन करके और अब यह मानकर कि दिल्ली की जनता तुझसे असंतुष्ट है और वह तुझे आगे शायद ही पसंद करे – पंजाब की ओर केजरीवाल का भागना उनकी अवसरवादी राजनीति का एक अंग है, जिसमें वह अपना भविष्य सुरक्षित देख रहे हैं। उनका यह निर्णय मौहम्मद तुगलक की याद दिलाता है जिसने राजधानी दिल्ली से दौलताबाद बनाने का निर्णय लिया था, पर अपनी फजीहत कराके वापस दिल्ली ही आ गया था। केजरीवाल को आना तो दिल्ली में ही है-पर अच्छा हो कि फजीहत कराके ना आयें।

बाजार की जरूरतों के लिए रानी पद्मावती जैसी धीर-गंभीर रानी को क्यों बाजारू बना रहे हो ?

ब्लॉग : कुमार प्रियांक (यूनाइटेड हिन्दी) :- जयपुर में ‘पद्मावती’ की शूटिंग कर रहे थे संजय लीला भंसाली। अब जबरदस्ती का मसाला डालने के लिए संभवतः अलाउद्दीन ख़िलजी और रानी पद्मावती के प्रेम प्रसंग को दिखा रहे हैं उसमें। बीच में राणा रतन सिंह को पता नहीं कहाँ गायब कर दिए हैं..??!!

भैया, जब ऐतिहासिक तथ्यों पे फ़िल्म बना रहे हो, तो उसमें बाजार की जरूरतों के लिए रानी पद्मावती जैसी धीर-गंभीर रानी को क्यों बाजारू बना रहे हो..?? फिर अब ऐसे में अभी तो सिर्फ करणी सेना आगे आई है, जरूरत पड़ी तो अखिल भारतीय महासभा भी उठ खड़ी होगी..!!

रणबीर सिंह जैसे बाँके जवान और दीपिका पादुकोण जैसी खूबसूरत हीरोइन की आपसी केमिस्ट्री तो फिर भी समझ आती है, उनके आपसी प्रेम-प्रसंग को भुनाने के लिए इन्ही दोनों को फ़िल्मी पर्दे पर क्रमशः अलाउद्दीन ख़िलजी व पद्मावती बना दिए..और अब हंगामा होगा तो तड़ से कहेंगे कि मोदी राज में असहिष्णुता बढ़ रही..!! क्रिएटिव फ्रीडम का मतलब बाजार से किसी तरह भी पैसा कमाने के लिए कुछ भी दिखाना नहीं होता है..!!

उधर दूसरी तरफ़ एक असमी फ़िल्म डायरेक्टर ने हिंदी फिल्मों की वजह से उनकी असमी फ़िल्म थिएटर से हटाने के चलते सीधे उल्फा के उग्रवादी नेता परेश बरुआ से ही फेसबुक पर अपील कर दी..और म्यांमार में छुपे परेश बरुआ ने लोकल चैनल पर खुद की धमकी भी प्रसारित करवा दी..!!

सच्चाई तो यही है कि ये अधिकाँश फ़िल्म वाले कोई सकारात्मक सन्देश देने की बजाए सिर्फ मसाला बेच कर बाजार से येनकेन-प्रकारेण पैसा निकालना जानते हैं। फ़िल्म “पीके” में आमिर खान शिवलिंग पर दूध चढ़ाने को संसाधनों की बरबादी बताते हैं। तो फिर क्यों नहीं कोई उनकी फिल्में चोरी से डाउनलोड करके देखे और जो महँगे होते सिनेमा हॉल में जाने से बेहतर उतने रूपये किसी जरूरतमन्द अपाहिज को दे दे..!!

उसी फ़िल्म में खुद के मज़हब में निहित कमियाँ बताने में कोताही कर गए क्योंकि उनको पता था कि फिर फ़िल्म की बैंड बज जानी थी..इसलिए जो कमजोर कड़ी है, उसकी सहिष्णुता का फायदा उठाकर शिव जी का मजाक बनाएँ..!!

हमारे देश के संविधान में हर किस्म की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर कुछ युक्तियुक्त निर्बन्धन है..जिसका पालन किया जाना चाहिए, वरना समाज में फिर असहिष्णुता का माहौल बनेगा जो देश की क़ानून-व्यवस्था में दिक्कतें पैदा करेगा..!! अतः सरकार को चाहिए कि समय रहते इस तरह के व्यावसायिक फिल्मकारों को कड़ा सन्देश दिया जाए जो ऐतिहासिक या फिर धार्मिक तथ्यों व परम्पराओं के साथ निज स्वार्थ हेतु छेड़छाड़ करते हैं..!!

पहले ही वामपंथी इतिहासकारों ने अपने आकाओं को खुश करने व खुद संस्थागत अड्डाओं पर बैठ कर मुफ़्त की रोटी तोड़ने के लिए देश की गौरवपूर्ण सभ्यता व सांस्कृतिक इतिहास के साथ काफी छेड़छाड़ कर कबाड़ा कर रखा है..!!

अब समय आ गया है कि इन ऐतिहासिक त्रुटियों को भी दूर किया जाए और तमाम ऐतिहासिक स्थलों तथा ऐतिहासिक पुस्तकों का निष्पक्ष व तार्किक अध्ययन किया जाए, न कि पूर्वाग्रहपूर्ण। इस निमित्त ऐतिहासिक स्थलों की क्षैतिज व उर्द्धवाधर खुदाई को और भी विस्तृत किया जाए। एक गौरवपूर्ण इतिहास किसी भी देश के नागरिकों का आत्मसम्मान बढ़ाने में सहायक होता है, जो प्रकारांतर से देश के वर्तमान व भविष्य को सुधारने में भी मदद देता है..!!

अगले पृष्ठ पर पढ़िये : चित्तौड़ की रक्षा के लिए होता रहा निरंतर संघर्ष