मनीष सिंह का ब्लॉग : 14 फरवरी को विश्व मातृ-पितृ पूजन दिवस के लिए स्पेशल

ब्लॉग : (मनीष सिंह तोमर) – परसों एक मित्र आर्मी की कैंटीन जूते खरीदने गया तो मुझे साथ ले गया। वहां एक छोटी बच्ची (करीब 6-7 साल की) भी जूते देख रही थी। एक वयस्क के दस नम्बर के जूते। बहुत जूते देखने के बाद उसने एक sports shoes का pair चुना और हमको दिखा के पूछा की अंकल ये जूते अच्छे लग रहे हैं न ? (पता नहीं छोटे बच्चे अभी से अंकल क्यों बोलने लगे) मैंने कहा अच्छे तो हैं पर ये आप किसके लिए ले रहे हो?

उसके बाद जो उस बच्ची ने उत्तर दिया मुझे वो सुनकर विश्वास नहीं हुआ पर जब हुआ तब बहुत ख़ुशी हुई। वो बोली की ये मैं 14 फरवरी को अपने पापा को दूँगी, उस दिन मम्मी पापा की पूजा होती है। मैं बहुत खुश हुआ। पेमेंट करने आयीं उसकी माताजी से पता चला की वो लोग किसी संत के साधक नहीं है। पहले इनकी जहाँ पोस्टिंग थी वहां पड़ोस में ये त्यौहार 14 फरवरी को मनाया जाता था वहां से इसने ये सीखा।

फिर याद आया की पिछले साल california की एक गिफ्ट शॉप से 14 feburary parents worship day की कुछ accessories की तस्वीरें भी आयीं थीं जिसमें गिफ्ट कार्ड्स key ring वगैरा थे। इस ‘दिवस’ ने कब ‘त्यौहार’ का रूप ले लिया हमें पता भी नहीं चला। ये अब लोगों के हृदय तक पहुँच चुका है और पहुंचे भी क्यों न आवश्यकता आविष्कार की जननी जो होती है, आपने आवश्यकता पैदा करी तो संत ने उसके विपक्ष में अविष्कार प्रस्तुत कर दिया।

यही होता है आप कई बरसों से उलटे होकर लटके हो, एक टांग पर खड़े होकर valentine day का प्रचार करते हो इतना पैसा बर्बाद करते हो इसके प्रचार में, पर होता क्या है??? हर साल आपको वही याद दिलाना होता है, हर साल कोई नई चमड़ा धारणी या चमड़ा धारक से वासना करना सीखाना होता है। पर किसी को भी उस बच्ची को ये बताने की जरूरत नहीं पड़ी की 14 फरवरी को उसे क्या करना है। क्योंकि इस अविष्कार ने उसके हृदय में जगह बनाई। असल में बात तो ये है कि आप ये भ्रम पाले बैठे थे कि प्रचार तंत्र (मीडिया) के सहयोग के बिना कुछ भी नया नहीं हो सकता। अच्छा है आपका ये भ्रम भी टूट रहा है।

और दूसरा भ्रम ये कि इसी प्रचार तंत्र से बैर लेकर तो कुछ नया सोचा भी नहीं जा सकता। आपका ये भ्रम भी टूट गया। आपने सारे छठकर्म तो किये, क्या कमी छोड़ी ? पर हमारे काम को रोक पाये ? या भविष्य में कभी रोक पाओगे? आप बस परिणामों को छुपा सकते हो पर परिणामों को आने से नहीं रोक सकते।

अब तो हंसी आती है आपकी हालत देख के, क्योंकि वास्तविकता तो ये है कि समाज से आपका बहिष्कार हो रहा है। आपके निर्माणाधीन किले की नींव झड़ रही है, प्रगति पर चल रहा आपका ये कार्य कभी संपन्न नहीं होगा। क्योंकि सुनार कितनी भी चोटें मार ले लुहार की एक ही काफी होती है।

आज 14 फरवरी को मातृ पितृ पूजन कार्यक्रम सम्पूर्ण देशभर में होने वाला है।
आप सभी को विश्व मातृ पितृ पूजन दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं।