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नई दिल्ली। सरकार ने आज कहा कि 10वीं कक्षा में बोर्ड परीक्षा वैकल्पिक बनाने का शिक्षा की गुणवत्ता पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ा है और अभी दसवीं बोर्ड परीक्षा को फिर से अनिवार्य बनाने का कोई प्रस्ताव नहीं है।

लोकसभा में पी डी राय और पी पी चौधरी के प्रश्न के लिखित उत्तर में मानव संसाधन विकास मंत्री स्मृति ईरानी ने कहा कि साल 2011 में 10वीं बोर्ड परीक्षा को वैकल्पिक बनाया गया था। इसके तहत जो छात्र सीबीआईएस प्रणाली को छोड़ना चाहते हैं, वे बोर्ड परीक्षा दे सकते हैं और जो सीबीएसई प्रणाली में बने रहना चाहते हैं, वे स्कूल परीक्षा दे सकते हैं। smriti-irani

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मंत्री ने कहा कि 2011 में दसवीं बोर्ड को वैकल्पिक बनाने के बाद पहला बैच ने 2013 में 12वीं में उपस्थित हुए। 2013 में 12वीं के छात्रों का पास प्रतिशत 82.10 था जिन्होंने स्कूल आधारित परीक्षा दी। जबकि 2011 में जिन छात्रों ने 10वीं कक्षा में बोर्ड परीक्षा देने का चयन किया उनका 2013 में पास प्रतिशत 82.12 था।

स्मृति ने कहा कि इससे स्पष्ट होता है कि दसवीं बोर्ड परीक्षा को वैकल्पिक बनने से शिक्षा की गुणवत्ता पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ा है। और अभी दसवीं बोर्ड परीक्षा को फिर से अनिवार्य बनाने का कोई प्रस्ताव नहीं है।

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