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बीजेपी को आशंका है कि हिन्दी पट्टी में पार्टी को सत्ता विरोधी लहर का सामना करना पड़ सकता है इसलिए वो गैर हिन्दी प्रदेशों पर ध्यान केंद्रित कर रही है।

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बीजेपी को आशंका है कि हिन्दी पट्टी में पार्टी को सत्ता विरोधी लहर का सामना करना पड़ सकता है इसलिए वो गैर हिन्दी प्रदेशों पर ध्यान केंद्रित कर रही है।     

नई दिल्ली : – बीजेपी ने 2019 के लोक सभा चुनावों की तैयारी शुरू कर दी। अगले आम चुनाव के मद्देनजर पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह की अध्यक्षता में बीजेपी कोर कमेटी की बैठक में 115 ऐसी नई सीटें “नए आधार” के तौर पर चिह्नित की गईं जिन पर पार्टी को जीत मिल सकती है। पार्टी के शीर्ष नेताओं का मानना है कि उसकी परंपरागत सीटों में से कई पर अगले आम चुनाव में हार का 100% सामना करना पड़ सकता है। इसीलिए पार्टी सात राज्यों की इन “नई सीटों” पर ध्यान केंद्रित कर रही है। इन राज्यों में ओड़िशा, पश्चिम बंगाल, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, तमिलनाडु, केरल और पूर्वोत्तर शामिल हैं।  इन सभी राज्यों में पार्टी विकल्प बनने की कोशिश करेगी।

कोर कमेटी की बैठक के बारे में जानकारी रखने वाले बीजेपी नेताओं ने बताया कि इन सभी राज्यों के महासचिवों और सचिवों को राज्यवार तरीके आगामी आम चुनाव की रणनीति का खाका बनाकर 16 अक्टूबर तक पेश करने के लिए कहा गया है। पार्टी सूत्रों के अनुसार पार्टी के शीर्ष नेतृत्व को लगने लगा है कि पार्टी को अपने मजबूत माने जाने वाले गढ़ों खासकर हिन्दी पट्टी में बीजेपी विरोधी लहर का सामना करना पड़ सकता है। बीजेपी के एक महासचिव ने बताया, “इसीलिए पार्टी को नए राज्यों में सीट जीतने पर काम करना होगा। बीजेपी को महाराष्ट्र, गुजरात, राजस्थान, मध्यप्रदेस और हरियाणा में भी सत्ता विरोध या करारी हार की लहर का सामना करना पड़ सकता है।”

2014 के लोक सभा चुनाव में बीजेपी नीत एनडीए गठबंधन को उत्तर प्रदेश की 80 में 72, महाराष्ट्र की 48 में 42, बिहार की 40 में 31 और गुजरात की सभी 26 तथा राजस्थान की सभी 25 लोक सभा सीटों पर जीत मिली थी। मध्य प्रदेश की 28 में 25 और हरियाणा की 10 में 7 सीटों पर बीजेपी को जीत मिली थी। वहीं पश्चिम बंगाल की 42 में 2, ओड़िशा में 21 में 1 सीटों पर जीत मिली थी। पश्चिम बंगाल में  ममता बनर्जी की टीएमसी और ओड़िशा में नवीन पटनायक की बीजेडी को सबसे ज्यादा लोक सभा सीटें मिली थीं।

बात दक्षिण भारत की करें तो तमिलनाडु की 39 में 1, तेलंगाना की 17 में 1 और आंध्र प्रदेश की 25 में 2 सीटों पर बीजेपी को कामयाबी मिली थी। आंध्र में बीजेपी ने टीडीपी के साथ मिलकर आम चुनाव लड़ा था। केरल में बीजेपी एक भी लोक सभा सीट नहीं जीत सकी थी। बीजेपी को उम्मीद है कि अगले आम चुनाव में केरल और कर्नाटक में उसकी सीटें बढ़ सकती हैं। पिछले चुनाव में पार्टी ने कर्नाटक की 28 में 18 सीटों पर जीत हासिल की थी। गैर बीजेपी शासित प्रदेशों पर ध्यान केंद्रित करने की रणनीति के तहत इन राज्यों में पहले से नए कार्यक्रम और योजनाओं की शुरुआत की जा चुकी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पिछले दो साल में ओड़िशा में तीन रैलियां कर चुके हैं। पूर्वोत्तर भारत की 25 लोक सभा सीटों को ध्यान में रखते हुए ही पीएम मोदी हर केंद्रीय मंत्री को  पूर्वोत्तर के राज्यों को हर महीने कम से कम दो बार पूर्वोत्तर जाने का निर्देश दे चुके हैं।

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